+

बचपन से ही था दिल में छेद, फिर भी जीता दुनियां का दिल

जब भी बॉलीवुड के सबसे खूबसूरत चेहरों की बात होती है, तो मधुबाला का जिक्र सबसे पहले होता है। उनके दीवानों और चाहने वालों की फेहरिस्त इतनी लम्बी थी कि उन दिनों मधुबाला को सिनेमा की 'सौन्दर्य देवी' कहा जाने लगा था। लेकिन बला की खूबसूरत ये अभिनेत्री दिल की बीमारी के चलते अपने 36वें जन्मदिन के महज 9 दिन बाद ही दुनियां छोड़ कर चली गई थीं।

प्रतीकात्मक

 

बचपन से ही था दिल में छेद

मधुबाला का जन्म वैलेंटाइन के दिन 14 फरवरी, 1933 को दिल्ली में हुआ था। उनका बचपन का नाम मुमताज जहां देहलवी था। उन्होंने मात्र 6 साल की उम्र में फ़िल्मी दुनियां में कदम रख दिया था। बचपन से ही उनके दिल में छेद था, इसलिए डॉक्टर्स ने उन्हें ज्यादा से ज्यादा आराम करने के लिए कहा था। लेकिन जिस फ़िल्मी दुनियां में वो थीं, वहां उन्हें लगातार काम करना पड़ता था। ऐसे में उनकी दिल की बीमारी बढ़ती गई, लेकिन मधुबाला के अंदर जीने की ललक थी। लिहाजा जब डॉक्टरों ने हाथ खड़े कर दिए थे, तो उसके नौ साल बाद तक वो जीवित रहीं थी। लेकिन जीवन के ये आख़िरी नौ साल उन्होंने बेहद अकेलेपन में गुजारे थे। इस दौरान गिने चुने लोग ही उनका हाल चाल जानने आते थे।

प्रतीकात्मक

 

फ़िल्मी जगत में अहम् भूमिका

मधुबाला की पहली फ़िल्म बसन्त (1942) थी। हिंदी सिनेमा जगत में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उनकी कई फ़िल्में जैसे मुगल-ए-आजम, तराना, चलती का नाम गाड़ी, मिस्टर एंड मिसेज 55, महल, हाफ टिकिट आदि इस बात को साबित करती हैं। फिल्म मुगल-ए-आजम के उनके किरदार अनारकली ने तो उन्हें सिनेमा की दुनियां में हमेशा हमेशा के लिए अमर कर दिया था। इसके लिए उन्हें फिल्म फेयर के लिए नामित भी किया गया था। 

प्रतीकात्मक

 

बॉलीवुड की आल टाइम ग्रेटेस्ट अभिनेत्रियों में हैं टॉप पर

अंदाज ऐसा कि पूरी दुनियां को कायल कर दे। आज भी कई अभिनेत्रियां उन्हें अपना रोल मॉडल मानती हैं। 1990 में एक फ़िल्मी पत्रिका ने बॉलीवुड की आल टाइम ग्रेटेस्ट अभिनेत्रियों का सर्वेक्षण किया, जिसमें 58 प्रतिशत लोगों के वोट के साथ मधुबाला नंबर एक पर रहीं थीं। उनके आस-पास कोई भी नहीं था। फिर दूसरे नंबर पर नरगिस 13 प्रतिशत के साथ थीं। 

प्रतीकात्मक

 

सदियों में बनती है कोई एक मधुबाला - मनोज कुमार

भारतीय डाक सेवा ने 18 मार्च, 2008 को मधुबाला की याद में एक डाक टिकट जारी किया था। इस मौके पर फ़िल्म अभिनेता मनोज कुमार ने कहा था। मधुबाला देश का चेहरा थीं। शताब्दी में कोई एक ही मधुबाला हो सकती है। जब भी उन्हें मैं देखता था तो मेरे दिल में ग़जल गूंजने लगती थी।