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यहीं भस्म हुए थे कामदेव, आज भी चिंह हैं मौजूद

कामेश्वर धाम मंदिर को एक अति प्राचीन मंदिर माना जाता है। शिव पुराण में इसका जिक्र आता है। मान्यता है की भगवान शिव ने देवताओं के प्रतिनिधि कामदेव को इस स्थान पर भी भस्म किया था। शिव पुराण में जिक्र आता है की समाधि में लीं भगवान शिव को जगाने के लिए कामदेव ने एक आम के बृक्ष के पीछे से छुपकर उन पर कामवाण चलाया था। जिसके बाद क्रोधित हुए भगवान शिव ने कामदेव को भस्म कर डाला था। कामेश्वर धाम मंदिर के परिसर में आज भी आधा जला वह आम का बृक्ष मौजूद है, जिसके पीछे छुपकर कामदेव ने वाण चलाया था। आपको बता दें की यह स्थान उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में है। बहुत से शिव भक्त इस स्थान पर दर्शन करने के लिए जाते हैं। इसके अलावा सावन तथा शिवरात्रि पर भीं इस स्थान पर बड़ी संख्या में लोग दर्शन और पूजन करने के लिए आते हैं। 

यहां स्थापित हैं तीन शिवलिंग -  

आपको बता दें की इस स्थान एक या दो नहीं बल्कि तीन शिवलिंग स्थापित हैं। यह शिवालय रानी पोखरा के पूर्व तट पर मिला था। इसमें जो शिवलिंग है वह आम के एक विशाल बृक्ष के नीचे की खुदाई में मिला था। जो थोड़ा सा खंडित भी है। इस शिवालय को अयोध्या के राजा कमलेश्वर ने स्थापित किया था। मान्यता है की इस स्थान पर आकर उनका कुष्ठ रोग सही हो गया था। इस शिवालय के पास में ही राजा कमलेश्वर ने एक पोखर का निर्माण कराया था, जिसको रानी पोखरा कहा जाता है। यही पर एक "बालेश्वर नाथ शिवलिंग" भी स्थापित है। जिसको चमत्कारी शिवलिंग कहा जाता है। इस प्रकार से मुख्य शिवलिंग के अलावा दो शिवलिंग और हैं। अतः यहां कुल तीन शिवलिंग हैं और इन तीनों के कारण इस स्थान का महत्त्व बहुत अधिक बढ़ जाता है।