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रहस्यों से भरा है यह मंदिर, होते हैं ईश्वर के साक्षात दर्शन

हमारे देश में कई ऐसे स्थान हैं। जिनको जानने के बाद लोग हैरान रह जाते हैं। देखा जाए तो भारत रहस्यों से भरा हुआ देश है। यहां कदम कदम पर कुछ ऐसे रहस्य मिलते हैं जो किसी को भी दंग कर सकते हैं। इसी क्रम में हम आज आपको एक अनोखे मंदिर के बारे में बता रहें हैं। इस मंदिर का नाम है "कोणार्क सूर्य मंदिर", यह मंदिर विश्व प्रसिद्ध है और देश विदेश से लोग इसको देखने के लिए आते हैं। लेकिन इस मंदिर की अपनी कई खासियत भी हैं। उन्ही के कारण लोगों की आज भी इस मंदिर में उत्सुकता बनी हुई है। 

भारत के उड़ीसा में है यह मंदिर

कोणार्क सूर्य मंदिर भारत के उड़ीसा में स्थित है। यह मंदिर जगन्नाथपुरी के उत्तर-पूर्व में 35 किमी की दूरी पर स्थित कोणार्क नामक स्थान पर स्थित है। यह मंदिर भगवान सूर्य को समर्पित था। जिनको उस समय के स्थानीय लोग "बिरंचि-नारायण" भी कहा करते थे। इस मंदिर के संबंध में एक पौराणिक कथा भी मिलती है। माना जाता है की श्रीकृष्ण ने अपने पुत्र साम्ब को श्राप दे दिया था। जिसके कारण उसको कोढ़ हो गया था। इसके बाद उसने कोणार्क में आकर ही भगवान सूर्य की उपासना की तथा उनसे पूर्ण स्वास्थ्य पाया। इसके बाद में साम्ब ने कोणार्क में भी एक सूर्य मंदिर का निर्माण किया था। 

अनोखे रहस्यों से भरा है मंदिर

कोणार्क के इस सूर्य मंदिर में कई प्रकार के रहस्य भी भरे हुए हैं। आपको बता दें की इस सूर्य मंदिर में 52 टन का चुंबक लगा हुआ है।  मान्यता है की इस सूर्य मंदिर के शिखर पर 52 टन का चुंबक लगा हुआ है। यह चुंबक समुद्र की कठनाइयों को कम करने का कार्य करता था। लोगों का मानना है की इसी चुंबक के कारण मंदिर समुद्र तट पर सैकड़ों वर्षो से सुरक्षित खड़ा हुआ है। लोगों की मान्यता यह भी है की मंदिर के अंदर अन्य छोटे चुंबक भी थे जिनको मुख्य चुंबक के साथ जोड़ कर कुछ इस प्रकार से सजाया गया था की मंदिर की बहुत सी प्रतिमाएं हवा में तैरती नजर आती थीं। लेकिन आधुनिक समय में यह मुख्य चुंबक समस्याओं का कारण बनने लगा था। असल में इस चुंबक के कारण बड़े जहाज भी मंदिर की और खींचे चले आते थे। इसी कारण अंग्रेजो ने इस चुम्बक को मंदिर से निकाल दिया। मुख्य चुंबक के निकलते ही मंदिर का चुम्बकीय संतुलन बिगड़ गया और कई दीवारें तथा विशाल पत्थर मंदिर से अलग होकर गिरने लगे थे। आज भी बड़ी संख्या में लोग सूर्य मंदिर को देखने के लिए जाते हैं। असल में यहां के गर्भगृह में भगवान सूर्य नारायण की प्रतिमा कुछ इस हिसाब से स्थापित की गई थी की जब आप निश्चित समय वपर हां जाकर दर्शन करते हैं तो आपको लगता है की आप सामने आकाश से सूर्य उतर कर आ गया है। इस द्रश्य  लिए आज भी लोग बड़ी संख्या में कोणार्क जाते हैं।