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आखिर माथे पर क्यों लगाया जाता है तिलक

भारतीय परंपरा में माथे पर तिलक लगाना एक धार्मिक कृत्य माना जाता है। जब भी किसी  शुभ कार्य को किया जाता यही जो प्रारंभ में माथे पर तिलक लगाया जाता है। कुछ लोग प्रतिदिन अपने माथे पर तिलक लगाते हैं। इससे कई लोगों के मन में प्रश्न उठता है की तिलक लगाने का कोई महत्त्व भी है या नहीं। क्या तिलक लगाने का कोई वैज्ञानिक महत्त्व है अथवा यह अवैज्ञानिक क्रिया मात्र है। आज हम आपको इन्ही प्रश्नों के उत्तर क्रमवार दे रहें हैं। 

तिलक लगाने का महत्व

आपको सबसे पहले बता दें की सनातन धर्म में जो धार्मिक क्रिया की जाती हैं। उनके अविष्कारक ऋषि न सिर्फ दार्शनिक थे बल्कि वैज्ञानिक भी। अतः किसी भी क्रिया को धर्म में जोड़ने से पहले उन लोगों ने इन दोनों तथ्यों को ध्यान में रखा था। यही कारण है की सनातन धर्म में प्रत्येक धार्मिक क्रिया के पीछे धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व दोनों ही होते हैं। इसी क्रम में हम आपको तिलक लगाने के पीछे के महत्व को यहां बता रहें हैं। आपने देखा ही होगा की तिलक को हमेशा भ्रूमध्य या आज्ञाचक्र पर ही लगाया जाता है। शरीर शास्त्र के अनुसार इस स्थान पर पीनियल ग्रंथि का स्थान माना जाता है। इस ग्रंथि का प्रकाश से गहरा संबंध माना जाता है। ध्यान करते समय मानव के अंतर में जो प्रकाश पैदा होता है। उसका इस विशेष स्थान से संबध होता है। हमारी दोनों भौहों के बीच में गहरी संवेदनशीलता होती है। यदि आप अपनी आंखें बंद कर के बैठ जाएं और कोई दुसरा व्यक्ति अपनी तर्जनी अंगुली को आप के आज्ञा चक्र की और धीरे धीरे ले जाता है तो आपको उसकी अनुभूति हो जाएगी तथा कुछ अजीब सा अनुभव भी होगा। इसी कारण कहा जाता है की इस स्थान पर थर्ड आई होती है। जब हम इस स्थान पर तिलक करते हैं तो तिलक से आज्ञा चक्र को निरंतर स्फुरणा मिलती रहती है।