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क्यों मनाया जाता है पुरुष दिवस।

 महिला दिवस के बारे में सभी को पता है, लेकिन संभवत: बहुत कम लोगों को मालूम होगा कि 19 नवंबर दुनिया भर में अंतरररष्ट्रीय पुरुष दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसकी शुरुआत 1999 में त्रिनिदाद एवं टोबागो से हुई थी। तब से प्रत्येक वर्ष 19 नवम्बर को दुनिया के  70 से अधिक देशों में मनाया जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र संघ भी इसे मान्यता देते हुए इसकी जरूरत की वकालत कर चुकी है। पुरुषों की भी अपनी समस्याओं को लेकर संघर्ष करना पड़ता है।

internationalmensday की वेबसाइट के अनुसार दुनिया में महिलाओं से तीन गुना अधिक पुरुष आत्महत्या करते हैं। बताते हैं कि तीन में से एक पुरुष घरेलू हिंसा का भी शिकार होता है। इनमें भावनात्मक उत्पीड़न भी शामिल है। और तो और महिलाओं से 4 से 5 साल पहले पुरुष की मौत हो जाती है या फिर असाध्य रोग या असनीय रहन—सहन झेलने को मजबूर होते हैं। दिल की बीमारी ज्यादा पुरुष को ही होती है। यानी कि महिलाओं से दोगुना पुरुष दिल की बीमारी के शिकार होते हैं।

वैसे तो पहली बार मिसौर यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर थॉमस योस्टर की कोशिशों के परिणामस्वरूप 7 फरवरी 1992 को अंतरराष्ट्रीय पुरुष दिवस मनाया गया था। तब सिर्फ अमेरिका, कनाडा और यूरोप के कुछ देशों में ही इससे संबंधित समारोह के आयोजन हुए। 

यह सिलसिला साल 1995 तक चलता रहा, लेकिन उसके बाद कुछ देशों ने फरवरी महीने में पुरुष दिवस मनाना बंद कर दिया। यही नहीं कई देश इस दौरान अपने-अपने हिसाब से पुरुष दिवस का आयोजन करते रहे। इस वजह से पुरुषों की मूल समस्या धरी की धरी रह गई।

आखिरकार साल 1998 में डॉ. जीरोम तिलकसिंह ने त्रिनिदाद एंड टोबेगो में पहली बार 19 नवंबर को इस दिवस को मनाने के लिए चुना। उनके इस प्रयास से 19 नवंबर को दुनिया भर के 70 से ज्यादा देशों में अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस मनाया जाता है। भारत में इसकी शुरूआत 2007 से हुई। तब यह पुरुषों के अधिकार के लिए लड़ने वाली संस्था 'सेव इंडियन फैमिली' द्वारा मनाया गया था। इसके द्वारा बनाई गई इंडिया मेन्स वेल्फेयर एसोसिएशन ने भारत सरकार से महिला विकास मंत्रालय की तरह पुरुष विकास मंत्रालय  बनाया जाने की मांग की है। इसके तहत महिलाओं की तरह पुरुषों की समस्याओं पर भी ध्यान देना जरूरी बताया गया है।