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भारत का वो जासूस, पाकिस्तान में बना आर्मी मेजर।

सलमान खान की फिल्म 'एक था टाइगर' और 'टाइगर ज़िंदा है' तो आपको याद होंगी ही। इन मूवी में सलमान ने एक RAW एजेंट का किरदार निभाया था। जिसका नाम 'टाइगर' था। वैसे तो इस फिल्म की कहानी काल्पनिक थी लेकिन सच बात तो ये है की एक व्यक्ति इंडिया की इंटेलिजेंस एजेंसी 'RAW' का एक ऐसा खतरनाक एजेंट था, जिसे 'ब्लैक टाइगर' के नाम से जाना जाता है। जो पाकिस्तान में जाकर, वहां की आर्मी में जुड़कर, मेज़र की रैंक तक पहुंच गया था। लेकिन अंत में वो किसी और की गलती से पकड़ा गया। जानिए, कौन था वो 'ब्लैक टाइगर'? आखिर क्यों पकड़ा गया था वो? क्या थी उसकी पूरी कहानी? 

परिचय 

ये कहानी है भारत के 'ब्लैक टाइगर' कहे जाने वाले 'रविंद्र कौशिक' की। रविंद्र का जन्म 11 अप्रैल 1952 को राजस्थान के श्रीगंगानगर में हुआ था। वो काफी सुंदर थे, और उनकी लम्बाई भी अच्छी थी। रविंद्र को एक्टिंग का शौक था इसलिए वो थिएटर में काम करते थे। उनकी एक्टिंग की कला इतनी अच्छी थी कि सब देखकर हैरान रह जाते थे।

RAW में भर्ती  

 एक दिन रविंद्र जब थिएटर में एक्ट कर रहे थे तो एक RAW (Research and Analysis Wing) के अधिकारी भी वहां मौजूद थे। जब RAW अधिकारी की नज़र उन पर पड़ी तो वो रविंद्र की कला देख खुश हो गए। थिएटर ख़त्म होने के बाद अधिकारी रविंद्र से मिले और रविंद्र को RAW का जासूस बनने की पेशकश की। रविंद्र ने भी तुरंत हाँ कर दिया। फिर यहीं से रविंद्र की बतौर RAW एजेंट की कहानी शुरू हुयी। 

मिशन 

इसके बाद रविंद्र को दिल्ली में 2 साल तक पाकिस्तानी बनने की ट्रेनिंग दी गयी। उन्हें उर्दू पढाई गयी, पाकिस्तान के भूगोल के बारे में बताया गया और यहां तक की एक पक्का मुस्लिम लगने के लिए रविंद्र का खतना भी किया गया। पाकिस्तान जाने से पहले उनके फर्जी दस्तावेज बनाये गए, जिनमें उनका नाम 'नबी अहमद शाकिर' था। इसके बाद 1975 में रविंद्र को मिशन के लिए पाकिस्तान भेजा गया। तब वो 23 साल के थे। पाकिस्तान के कुछ इलाकों में पंजाबी बोली जाती है और रविंद्र को भी पंजाबी बोलनी आती थी इसलिए उन्हें वहां घुलने-मिलने में ज्यादा समय नहीं लगा। 

बतौर एजेंट ‘कामयाबी’ और ‘उपाधि’ 

खूफिया रास्ते पाकिस्तान पहुंचकर रविंद्र वहां अच्छी तरह से बस गए। कुछ समय बाद रविंद्र पाकिस्तान की सेना के सारे टेस्ट पास कर सेना में भर्ती भी हो गए। फिर सेना के यूनिट के ही एक दर्जी की बेटी अमानत के साथ उन्होंने शादी कर ली। शादी के बाद रविंद्र और अमानत का एक बेटा भी हुआ। 

पाकिस्तान की सेना में सिपाही रहकर रविंद्र ने भारत को बहुत सी जानकरियां दी। कुछ साल बाद सेना में रविंद्र का कद बढ़ा तो उन्हें 'मेजर' की रैंक दी गयी। सेना के मेजर पद पर रहते रविंद्र ने भारत को तमाम जरूरी जानकारियां दी। जो बहुत मददगार भी साबित हुई। रविंद्र की इस कामयाबी को देखते हुए RAW ने उन्हें "ब्लैक टाइगर" का नाम दिया। 

दूसरे की गलती की सज़ा 

 1983 में RAW ने अपना एक जासूस 'इनायत मसीह' पाकिस्तान भेजा। जिसे पाकिस्तानी खूफिया एजेंसी 'ISI' ने पकड़ लिया। पकड़े जाने पर जब उसे टॉर्चर किया गया तो उसने रविंद्र के बारे में सब बता दिया। जिससे 'ब्लैक टाइगर' की 'बेमिसाल जासूसी' का भी अंत हो गया। 

 इसके बाद रविंद्र भी पकड़े गए। जब पाकिस्तान ने भारत सरकार से बात की तो भारत सरकार ने रविंद्र को पहचानने से इंकार कर दिया। इधर टॉर्चर के बाद भी रविंद्र ने RAW के बारे में कुछ नहीं बताया। 1985 में रविंद्र को 'सज़ा ए मौत' सुनाई गयी। लेकिन बाद में इसे बदलकर उम्रकैद कर दिया गया। 

निधन 

1999 में 16 वर्ष की कठिन यात्नाऐं सहने के बाद मुल्तान की सेंन्ट्रल जेल में रविंद्र का निधन हो गया और इस तरह 47 साल बाद देश के इस बेटे ने अपनी भारत माँ की के लिए जान दे दी। लेकिन इसके बाद भी भारत सरकार ने रविंद्र के शव लेने से इंकार कर दिया।