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दूसरी औरत को वश में करने के लिए मार डाला उल्लू को।

डिजिटल इंडिया और इंटरनेट के दौर में दिल्ली पुलिस ने 12 नवंबर को सुल्तानपुरी के रहने वाले एक अंधविश्वासी व्यक्ति को गिरफ्तार किया। उसकी नजर एक पराई स्त्री पर थी। वह उससे एकतरफा प्यार करता था, लेकिन उसे वश में करने के लिए उसने तंत्र—मंत्र का सहारा लिया। उसे किसी ने बताया था कि यदि जिस औरत को वश में करना है उसके बाल से उल्लू के पंख को मिलाकर पूजा करने से ऐसा संभव हो सकता है।   

उसके द्वारा तंत्र विद्या से उल्लू की बलि देने संबंधी तांत्रिक अनुष्ठान करने की भनक पड़ोसियों को लग गई। उन्होंने पुलिस को खबर कर दी और वह गिरफ्तार कर लिया गया। उसकी गिरफ्तारी भारत के पशु कल्याण बोर्ड के टिप ऑफ पर की गई। पक्षी का शव पुलिस द्वारा उसके घर के कूलर के अंदर पाया गया।

कहानी पेशे से एक ट्रक ड्राइवर कन्हैया की है। उसने यह सब एक अन्य औरत को आकर्षित करने के लिए किया। जबकि उसके परिवार में उसकी पत्नी और तीन बच्चे हैं। बताते हैं कि उन्हें भी किए जाने वाले अनुष्ठान के बारे में पता था। उसके पिता की मृत्यु दिवाली पर हो गई थी, फिर भी वह तंत्र—मंत्र में लगा रहा।

उल्लू के शव परीक्षण के बाद पता चला था कि उसकी मौत कई घावों के कारण हो गई थी। उसके पंजे पर चाकू से काटने के निशान पाए गए थे। कई सुइयों को फेफड़ों और यकृत में लगाया गया। यह सब काले जादू के प्रयोग की ओर इशारा करने जैसा था।

पूछताछ के दौरान उसने पुलिस को बताया कि दिल्ली में एक अज्ञात स्थान से उल्लू खरीदा था। काला जादू करने के लिए ही उल्लू की बलि दी। इस अनुष्ठान की जानकारी के बारे में आरोपी ने पुलिस को एक यूट्यूब वीडियो दिखाया, जिसमें उल्लू की बलि और तांत्रिक अनुष्ठानों की प्रक्रिया को विस्तार से बताया गया था। यूट्यूब में कहा गया था कि ऐसा करने से आप उस व्यक्ति को सम्मोहित कर सकते थे, जिसे आप चाहते हैं।

जांच में यह भी पता चला कि कन्हैया इलाके में काफी दिनों से तंत्र-मंत्र करता रहा है और इस दौरान वह आसपास की औरतों की समस्याओं समाधान करता था।

बहरहाल, 'तंत्र-मंत्र और इन्हीं मनगंढ़त बातें और अंधविश्वास के कारण उल्लुओं पर खतरा मंडराता रहता है। एनिमल राइट्स के लिए काम करने वाले एक कार्यकर्ता का कहना है कि दिवाली के दौरान एक उल्लू को 35 हजार रुपये तक में बेचा जाता है।  वाइल्डलाइफ प्रटेक्शन ऐक्ट के तहत उल्लू को संरक्षित पक्षियों की लिस्ट में रखा गया है। उन्हें पकड़ने, कैद कर रखने, बेचने-खरीदने या किसी तरह का कोई नुकसान पहुंचाने में 3 साल तक की कैद और जुर्माना हो सकता है। 

पीपल फॉर एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ ऐनिमल्स (पीटा) के असोसिएट डायरेक्टर निकुंज शर्मा के अनुसार  तंत्र-मंत्र के नाम पर उल्लुओं की स्मगलिंग बहुत बड़े पैमाने पर होती है। दिल्ली के एनसीआर से भी कई उल्लू पकड़े जाते हैं और अवैध रूप से बेचे जाते हैं। इसके अलावा उत्तर प्रदेश और बिहार से भी उल्लुओं की खपत की जाती है। इस तरह के कई मामले में दो लीटर की प्लास्टिक की बोतलों में डालकर उल्लुओं की स्मगलिंग की जाती है। बोतल को ऊपर से काटकर इनमें उल्लू भरे जाते हैं और बाहर कपड़ा लपेट दिया जाता है।