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प्रियंका चोपड़ा की शादी में ब्राइडल शावर

शादियों के मौसम में शुभ मुहूर्त से लेकर निभाए जाने वाली रस्में विवाह के माहौल को मजेदार बना देती हैं। और जब 'देसी गर्लप्रियंका चोपड़ा की बात हो तो फिर क्या कहनें! आईए जानते हैं उनकी शादी से जुड़ी एक खास रोचक बात।  

ब्राइडल शावर

पिछले दिनों प्रिंयका चोपड़ा की दोस्तों ने उनके लिए ब्राइडल शावर का आयोजित किया था। इसके बारे में अधिकतर को मालूम होलेकिन कुछ के लिए विवाह का यह रस्म अनोखा भी लग सकता है। इसका आयोजन शादी से दो महीने पहले ही शुरू हो जाता हैजो हफ़्ते पहले तक चलता रहता है। इसके कुछ नियम खास होते हैंजो लोगों को एकदूसरे के दिलों से जोड़ते हैं और दुल्हन के साथ भावनात्मक रिश्ता प्रगाढ़ बनता है।

ब्राइडल शावर मुख्य तौर पर अमरीका और कनाडा में शादी से पहले आयोजित की जाने वाली एक परंपरा हैजिसका आयोजन दुल्हन की सहेलियों के द्वारा किया जाता है। 

इस दौरान वे अपनी प्रिय दुल्हन को तोहफे देती हैं। तोहफे भी खास होते हैंजिसमें उनके दैनिक जीवन में काम आने वाली चीजें होती हैं। आमतौर पर सामान्य शादियों में इस तरह के उपहार वरवधु को दिए जाते हैं।

इसका आयोजन किसी शॉपिंग मॉल में दुल्हन के नाम रजिस्टर जगह पर किया जाता है।  दुल्हन अपनी ज़रूरत की चीज़ें वहां लिख देती हैजिसे उनके दोस्त अपनी बजट के हिसाब से तोहफे के तौर पर भेंट करते हैं। इस परंपर का विशेष फायदा यह होता है कि दुल्हन को दो सामान एक ही तरह के नहीं मिलते हैं। फिर भी तोहफे की ज़रूरत हो न होलेकिन यह आयोजन दुल्हन को शादी से पहले दुल्हन बनने के अहसास करवा देता है।

प्रियंका के लिए ब्राइडल शावर का आयोजन मीडिया में चर्चा का विषय बन गया था।

पश्चिमी देशों में इस तरह का आयोजन दुल्हों के लिए भी किया जाता हैजिसे बैचलर नाइट कहा जाता है। इसमें दुल्हे के दोस्त पूरी रात जश्न मनाते हैं।

ब्राइडल शावर की तरह ही हैं हमारी देसी रस्में

माझा बैठना: इसे भले ही हल्दी की रस्म के नाम से जाना जाता होलेकिन इस मौके पर दुल्हे के यहां से आई हुई हल्दी दुल्हन को लगाई जाती है। जमाने के बदलाव का असर इस रस्म पर भी पड़ा है। अब यह हफ्ते भर नहीं चलता हैलेकिन पीले परिधान में दुल्हन के साथ जुड़ी भावनाएं जस की तस हैं। परिजन दुल्हन को उपहार देते हैंजबकि दुल्हन की सहेलियां ढोल की थाप पर नृत्यगीत करती हैं। उस दिन के बाद से दुल्हन घर से बाहर नहीं निकलती है।

वटना की रस्म : पंजाब में 'वटनाकी रस्म बहुत लोकप्रिय है जो बहुत हद तक हल्दी और उबटन की रस्म से मिलती-जुलती है। इसके साथ ही दुल्हन को शादी से पहले सजानेसंवारने का काम शुरू हो जाता है। इस दौरान एक चूड़ी की रस्म होती है। यह ब्राइडल शावर की तरह ही हैजिसमें सहेलियां दुल्हन के लिए लाल और हरी चूड़ियां लाती हैं और हर सहेली एक-एक चूड़ी पहनाती है। ये रस्म शादी से एक महीना पहले होती है।

दुल्हन इन चूड़ियों को उस वक़्त तक पहनती है जब तक चूड़ा की रस्म नहीं हो जाती। चूड़ियां ननिहाल या मामा के यहां से उपहार के तौर पर आती हैं। ये चूड़ियां एक समारोह में दुल्हन के हाथों में डाली जाती हैं.

पंजाबी शादी से पहले 'जागोकी भी एक खास रस्म काफी मजेदार होती है। इसमें गांव वालों को शादी के बारे में बताया जाता है और इस दौरान काफी शरारतें होती हैं। महिलाएं सिर पर मिट्टी के बर्तन रखती हैं। इसमें पारंपरिक तौर पर दीप जलाए जाते हैं। जो आग और पानी का प्रतिनिधित्व करते हैं। महिलाएं सिर पर इस घड़ा रखकर गांव और मोहल्ले में घूमकर शादी का शोर करती हैं। ये रस्में एक तरह से देसी ब्राइडल शावर ही है।