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क्या है लाल किले के लाल रंग का राज

वैसे तो लाल किला किसी के पहचान का मोहताज़ नहीं है लेकिन फिर भी शायद लाल किले के बारे में कुछ महत्वपूर्ण बातें आप नहीं जानते होंगे। चलिए आज की इस रिपोर्ट में बात करते हैं लाल किले के कुछ महत्वपूर्ण जानकारियों के बारे में।

लाल किले को 2007 में UNESCO के आधार पर World Heritage (विश्व धरोहर) में शामिल किया गया था। लाल किले को 5वें मुग़ल बादशाह शाहजहां ने बनवाया था। शाहजहां की सल्तनत के मशहूर कारीगर उस्ताद अहमद लाहौरी की देख रेख में सन 1639 में लाल किला बनाने का कार्य शुरू किया गया था जो की लगभग 10 साल बाद 1648 में पूरा हुआ। शाहजहां ने अपनी राजधानी आगरा से बदलकर दिल्ली कर दी थी, दिल्ली को तब शाहजहांनाबाद के नाम से जाना जाता था जिसे अब पुरानी दिल्ली के नाम से जाना जाता है। उस समय यह किला शाहजहांनाबाद का केंद्र बिंदु था। शाहजहाँ द्वारा लाल किले को अपना महल बनाया गया, इस से पहले शाहजहां का राजमहल आगरा के किले में हुआ करता था। इन्हीं तरह की नयी नयी इमारतों का निर्माण करने में शाहजहां की बहुत रूचि थी।

लाल किले की दीवारों का रंग लाल होने के कारण इसे लाल किला कहा जाता है। लेकिन कहा ये भी जाता है की लाल किले के निर्माण में जिस पत्थर का प्रयोग हुआ है उसका रंग सफ़ेद है, लाल किले पर अंग्रेजों का अधिकार होने के बाद देखा गया की किले के पत्थर ख़राब होने लगे हैं इसलिए अंग्रेजों ने किले की दीवारों पर लाल रंग करवाया जिस कारण किले का नाम लाल किला पड़ा। इससे पहले किले को "किला ए मुबारक" कहा जाता था।कुछ मतों के अनुसार इसे लालकोट का एक पुरातन किला बताते हैं, जिसे शाहजहाँ ने कब्जा़ करके यह किला बनवाया था। लालकोट राजा पृथ्वीराज चौहान की बारहवीं सदी के अन्तिम दौर में राजधानी थी।

इतिहास

  1739 में फ़ारसी बादशाह नादिर शाह ने मुगलों को पराजित कर किले को लूट लिया और 3 महीने बाद फारस चला गया। इसके बाद मुगलों ने खुद को कमजोर देखते हुए 1752 में मराठों से संधि की और उन्हें किले का रक्षक बना दिया। फिर 1758 में लाहौर और पेशावर को जीतते हुए अफगानी शाशक अहमद शाह दुर्रानी ने मराठो से संघर्ष किया लेकिन परास्त हो गया। फिर 1761 के पानीपत के तीसरे युद्ध में मराठों को हराकर दिल्ली दुर्रानी की हो गयी और किला पर भी दुर्रानी का कब्ज़ा हो गया। 10 साल बाद फिर मराठो की मदद से अफगानी शाशक को हराकर दिल्ली पर मुगलों का कब्ज़ा हो गया, जिसका शाशक बना शाह आलम।    1783 में सिखों ने बगेल सिंह धालीवाल की अगुवाई में दिल्ली और लाल किले पर कब्ज़ा कर दिया। 1788 में, मराठा सेना ने स्थायी रूप से लाल किले और दिल्ली पर कब्जा कर लिया और अगले दो दशकों तक उत्तर भारत पर शासन किया। फिर 1803 में दूसरे एंग्लो-मराठा युद्ध के दौरान, ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना ने दिल्ली की लड़ाई में मराठों को हराया। जिसके बाद अंग्रेजों ने दिल्ली पर शाशन किया और किले को अपना रहने का स्थान बनाया।  सन 1857 में अंग्रेजों के खिलाफ लड़ने वाला आखिरी मुगल बना बहादुर शाह। जिसमे वह पराजित हो गया। 1857 के बाद से किले को ब्रिटिश सेना के मुख्यालय के रूप में प्रयोग किया।

   उसके बाद से दिल्ली पर अंग्रेजों का ही साशन रहा। कहा जाता है की किले पर अंग्रेजों का कब्जा होने के बाद अंग्रेजों ने किले के 2 तिहाई हिस्से को तबाह कर दिया। और कीले की बहुमूल्य चीज कोहिनूर हिरे को ब्रिटिश ले गए  जो आज भी ब्रिटिश म्यूसियम में है।   इसके बाद भी कई स्वतंत्रता सेनानियों की कहानियाँ लाल किले से जुडी हुई हैं जिनमे से एक कहानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की है। सन 1940 में नेताजी ने दिल्ली चलो का नारा दिया और लाल किले पर तिरंगा फहराने का आव्हन किया। जिसके बाद आज़ाद हिन्द फ़ौज के अफसरों पर किले में ही मुकदमा चलाया गया था और यहीं आज़ाद हिन्द फ़ौज के अफसरों को कैद करके रखा गया था।

 15 अगस्त 1947 को भारत आज़ाद होने के बाद लाल किले को भारतीय सेना के अधीन कर दिया गया। किले का एक महत्वपूर्ण हिस्सा 22 दिसंबर 2003 तक भारतीय सेना के नियंत्रण में रहा। जो की 2003 के बाद पर्यटन विभाग को सौंप दिया गया। 22 दिसंबर 2000 को लश्कर तय्यबा के 2 आतंकवादियों ने लाल किले पर हमला किया था, जिसमें 2 सैनिक और 1 नागरिक मारे गए थे।

 15 अगस्त 1947 को देश आज़ाद होने के बाद प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने लाल किले में तिरंगा फहराया था, और फिर यही से भाषण दिए थे। जिसके बाद से हर साल देश के प्रधानमंत्री लाल किले में राष्ट्रीय पर्व पर तिरंगा फहराते हैं।  

सुरक्षा

  स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर लाल किले की सुरक्षा विशेष रूप से सख्त होती है। दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक कर्मियों द्वारा किले के आस-पास नजर रखी जाती है और किले के पास उच्च सुरक्षा पर राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड के शार्पशूटर तैनात किए जाते हैं। किले के चारों ओर हवाई क्षेत्र में हवाई हमलों को रोकने के लिए उत्सव के दौरान नो-फ्लाई जोन घोषित होता है। पास के इलाकों को भी सुरक्षित रखा जाता है, जहां प्रधान मंत्री और अन्य नेता हमले की स्थिति में पीछे हट सकें।

तो ये थी कुछ जानकारियां विश्व धरोहर में शामिल भारत के लाल किले  के बारे में