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चुनाव से पहले ही बिखरा महागठबंधन, बिहार में हो सकता है बड़ा फैसला

जैसे-जैसे देश में चुनाव नजदीक आते जा रहे थे, विपक्ष के लगभग सभी राजनैतिक पार्टियां महागठबंधन में शामिल होकर बीजेपी को सत्ता से बाहर फैकने में जुटी थी। अब जब लोक सभा चुनाव की तारीखों का एलान हो चूका है, महागठबंधन बिखरता नज़र आ रहा है। उत्तर-प्रदेश में पहले ही सपा और बहुजन समाजपार्टी ने एक साथ लड़ने का फैसला कर कांग्रेस से नाता तोड़ लिया है, अब ऐसा ही समीकरण हर राज्य में नज़र आता दिखाई दे रहा है। 

प्रतीकात्मक

 

अगर बिहार की बात करें तो यहां कांग्रेस और राजद के बीच हुए गठबंधन में सीटों पर दावेदारी को लेकर जबरजस्त आरपार की हालात बनी हुई है। अगर किसी एक ने अगर जिद नहीं छोड़ी तो महागठबंधन का टूटना तय  है। सुलह के रास्ते बंद हो गए हैं। बात विकल्प तक पहुंच गई है। सूत्रों का दावा है कि राजद ने तय कर लिया है कि कांग्रेस के लिए आठ सीटें छोड़कर बाकी 32 सीटों को साथी दलों में बांट लिया जाएगा। खाका तैयार कर लिया गया है। मंगलवार को किबहसी भी वक्त पर्दा हटा दिया जाएगा। 

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बताया जा रहा है राजद कांग्रेस को उसके हाल पर छोड़कर गठबंधन में शामिल दलों को मनमाफिक सीटें दे सकती हैं। जिसमें रालोसपा को पांच, हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा को तीन और एक नवादा विधानसभा सीट एवं विकासशील इंसान पार्टी को दो सीटें मिल सकती हैं। वामदलों से भी बातचीत जारी है। तेजस्वी लगातार दीपंकर भïट्टाचार्य के संपर्क में हैं। बात बनी तो माले को आरा और जहानाबाद की सीटें दी जा सकती हैं। भाकपा को भी एक बेगूसराय सीट देने के लिए तेजस्वी तैयार हैं। शरद यादव की पार्टी के लिए भी एक सीट छोड़ी जा सकती है। 

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उधर कांग्रेस से जुड़े सूत्र का दावा है कि राजद के रवैये से गठबंधन टूटने की आशंका बढ़ गई है। शीर्ष स्तर पर हस्तक्षेप नहीं हुआ तो यूपी और पश्चिम बंगाल की कहानी बिहार में भी दोहराई जा सकती है। हालात बता रहे कि महागठबंधन के घटक दल दो धड़ों में बंट गए हैं। दोनों अपने-अपने स्टैंड पर अड़े हैं। मामला तभी पटरी पर आ सकता है, जब राजद और कांग्रेस में से कोई एक अपनी जिद से पीछे हटे। दोनों इसके लिए तैयार नहीं दिख रहे हैं। बैठकें अलग-अलग हो रही हैं। दबाव की राजनीति चरम पर है।