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प. बंगाल में बदलती चुनावी तस्वीर, टीएमसी और भाजपा के बीच होगी बड़ी टक्कर

जैसे-जैसे लोकसभा चुनाव -2019  करीब आता जा रहा है, राजनैतिक शरगर्मी बढ़ती जा रही है। अगर पश्चिम बंगाल की बात करें, इस बार चुनावों के लिहाज से यहां का माहौल बेहद संवेदनशील बताया जा रहा है। लोकसभा चुनाव से पहले ही राज्य में ममता सरकार और केंद्र की मोदी सरकार के बीच कई बार खींचातान चुकी हैं। प्रदेश की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भाजपा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह के विरुद्ध मोर्चा खोले हुए है।  

प्रतीकात्मक

 

2014 से पहले बंगाल में पहले सीपीएम और कांग्रेस के बीच चुनाव के दौरान अक्सर हिंसक झड़पें होती थीं। लेकिन आज समीकरण बदल चुके है। ममता बनर्जी ने सारी विपक्षी पार्टियों को एक साथ मिलकर भाजपा को दिल्ली की सत्ता से बाहर करने करने का फैसला किया है। दूसरी ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अध्यक्ष अमित शाह और भाजपा के कई बड़े नेता ममता के विरोध के बाद भी राज्य में कई रैलियां कर चुके हैं। मोदी भी अपनी हर रैली में ममता को निशाने पर लेते देखे जाते हैं। उन्होंने भ्रष्टाचार के मामले को लेकर भी ममता को घेरा है। 

प्रतीकात्मक

 

पश्चिम बंगाल में वोटरों की कुल संख्या 6.55 करोड़ है। जिसमें महिला वोटरों की संख्या 3.39 करोड़ और पुरुष वोटरों की संख्या 3.16 करोड़ है। 2016 विधानसभा चुनाव में 294 सीटों पर कुल 83.27 फीसदी मतदान हुआ था। विधानसभा चुनाव में टीएमसी को 212, कांग्रेस को 43, वामदल को 31, भाजपा को 3 और जीजेएम को 3 सीटें मिली थीं। अगर लोकसभा चुनाव  2014 की बात करें, राज्य में  42 सीटों पर 83.27 फीसदी मतदाना हुआ था। टीएमसी को 34, कांग्रेस को 4, और सीपीएम-भाजपा को दो-दो सीटें मिली थीं। इन आंकड़ों से अंदाजा लगाया जा सकता है कि प. बंगाल में ममता बनर्जी का किस कदर दबदबा है।