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कुंभ 2019 - जानें नागा साधुओं की धूनी और उनके जीवन के बारे में

प्रयागराज में कुंभ की शुरुआत हो चुकी है। दूर दूर के साधुओं का जमावड़ा वहां लग चुका है और उनके भक्त भी वहां पहुंचने लगें हैं। कुंभ मेले के क्षेत्र को यदि आप देखेंगे तो पाएंगे की सारे क्षेत्र में धुआं लगातार ऊपर की और उठ रहा है। असल में यह धुआं साधुओं की धूनी से उठता है। प्रत्येक साधू अपने स्थान पर एक धूनी को जलाता है जो हमेशा प्रज्वलित रहती है। इन धुनियों को देखकर सभी लोगों के मन में कई प्रश्न उठते हैं। आपको बता दें की या धूनी आम यज्ञ स्थल नहीं होती हैं बल्कि ये नागा साधुओं के जीवन से जुड़ी होती हैं। इनमें नागाओं की तपस्या का पूरा बल समाया हुआ होता है। इनसे तथा नागाओं के जीवन से जुड़े कुछ ऐसे तथ्य हैं जिनके बारे में आम लोग नहीं जानते हैं। आज हम आपको इन सभी तथ्यों के बारे में ही यहां बता रहें हैं। आइये जानते हैं इन तथ्यों के बारे में। 

प्रतीकात्मक

नागा साधुओं की धूनी और उनके जीवन के तथ्य - 

सबसे पहले हम आपको बता दें की धुनि कोई आम यज्ञ स्थल नहीं होती है बल्कि उसको नागा साधू शुभ मुहूर्त में सिद्ध मंत्रों से जाग्रत कर प्रज्जवलित करता है। साधू इस धूनी को कभी अकेला नहीं प्रज्जवलित कर सकता है। इसको जलाने के लिए उसके साथ उसके गुरु का होना आवश्यक होता है। गुरु की अनुमति तथा सहायता से ही इसको जलाया जाता है। यह भी ध्यान रखा जाता है की धूनी हमेशा जलती रहे  साधू को धूनी के आसपास ही रहना होता है। साधू के पास में एक चिमटा भी होता है। जिसका कार्य धूनी की आग को व्यवस्थित करना होता है। इस चिमटे को धुनि के पास ही रखा या गाड़ा जाता है। नागा साधुओं के संप्रदाय में यह मान्यता है की यदि कोई नागा धूनी के पास बैठकर आशीर्वाद दे देता है या कुछ कह देता है तो उसकी बात जरूर सच होती है। नागा साधू का लगभग पूरा जीवन अपनी धूनी के आसपास ही गुजरता है। जब नागा साधू यात्रा में होते हैं तब धूनी उनके साथ नहीं होती है लेकिन यदि वे कहीं डेरा जमाते हैं तो सबसे पहले धूनी को जलाते हैं। इस प्रकार से देखा जाए तो धूनी नागा साधुओं के जीवन का अंग ही होती है।