+

राजनैतिक पार्टियों ने ‘फंड’ के नाम पर जुटाए 1046 करोड़ रुपए

प्रतीकात्मक

आमतौर पर देखा जाता है कि सभी राजनैतिक दल चुनावों में खूब पैसा खर्च करते हैं। जिसके कारण आजकल चुनावी प्रचार भी जोरों-शोरों से होने लगे हैं। लेकिन एक वाजिब सवाल सबके मन में है, कि इन पार्टियों के पास इतना पैसा आता कहाँ से है? तो इस सवाल का वाजिब जवाब है कि इन पार्टियों को ये पैसा जनता ही फंड के रूप में देती है। ये फंड ‘इलेक्टोरल बांड’ के रूप में होता है। चुनाव आयोग द्वारा गणना की गयी कि सभी राजनैतिक दलों द्वारा पिछले 9 महीनों में इलेक्टोरल बांड के रूप में 1045.53 करोड़ रूपये जुटाए गए हैं। जो कि एक बहुत बड़ी संख्या है। लेकिन आपको बता दें कि यह संख्या पिछले 9 महीनों में बहुत अधिक बढ़ी है। क्योंकि इलेक्टोरल बांड के रूप में चुनावी फंड इसी साल से लिया जा रहा है। केंद्र सरकार ने चुनावी फंड में काले धन पर रोक लगाने के लिए जनवरी 2018 में इलेक्टोरल बांड का ऐलान किया था। 

क्या थे पुराने नियम? 

पिछले नियमों के अनुसार किसी पार्टी द्वारा 20 हजार से अधिक का चुनावी फंड चेक में लिया जाता था और इससे कम कैश में, जिसकी कोई रशीद नहीं होती थी। इसलिए राजनैतिक पार्टियां अधिकतर फंड 20 हजार से कम का ही बताते थे और चुनाव आयोग को फंड का ब्यौरा देने से बच जाते थे। स्पष्ट है कि जिनके पास काला धन होता है, वो ही अपने स्वार्थ के लिए काले धन को फंड के रूप में देते थे। यही काला धन पार्टी के पास पहुंच कर फिर एक प्रकार का धन बन जाता था। लेकिन अब इलेक्टोरल बांड के जरिये ऐसा नहीं होता।

प्रतीकात्मक

‘इलेक्टोरल बांड’ क्या है?

‘इलेक्टोरल बांड’ या ‘चुनावी बांड’ भारत सरकार द्वारा जारी की गयी एक प्रणाली है। इसके जरिये वही चुनावी फंड जो पहले राजनैतिक पार्टियों के पास काले धन के रूप में आता था, अब बैंक के जरिये आता है। इस प्रणाली से फंड का पाई-पाई का हिसाब आयोग तक पहुंचा और चुनावी फंड के रूप में काला धन समाप्त हुआ। ये चुनावी बांड भारतीय स्टेट बैंक की चुनिंदा शाखाओं में 1 हजार रु, 10 हजार रु, 1 लाख रु, 10 लाख रु और 1 करोड़ रु के होते हैं। इनके ऊपर करेंसी नोट की तरह इनकी कीमत लिखी होती है। इन्हें कोई भी नागरिक, संस्था या कंपनी चुनावी चंदे के लिए खरीदकर, किसी राजनैतिक पार्टी को दे सकती है। कोई भी राजनैतिक दल केवल 2000 तक की राशि ही चंदे के रूप में ले सकता है।

इलेक्टोरल बांड से जुड़े कुछ नियम

• दानकर्ता बांड उसी पार्टी को दे  सकेगा जो चुनाव आयोग में रजिस्टर हो और जिस पार्टी को पिछले चुनावों में कम से कम 1% प्रतिशत वोट मिला हो। 

• हर महीने 10 बांड की बिक्री होगी। लेकिन जिस वर्ष लोक सभा चुनाव होंगे उस साल बांड खरीदने के लिए 30 दिन एक्स्ट्रा दिए जाएंगे। 

• बांड खरीदने के बाद उसका स्तेमाल 15 दिन के भीतर चंदे के रूप में करना होगा। 

• बांड राजनैतिक दल के रजिस्टर्ड खाते में जमा होंगे और हर दल को अपने सालाना प्रतिवेदन में बताना होगा कि उसे कितने बांड मिले। 

• बैंक के पास यह जानकारी होगी की बांड किसने खरीदा है लेकिन बांड खरीदने वाले की पहचान गुप्त रखी जाएगी।