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राजनैतिक पार्टियों के लिए FACEBOOK ने दिया बड़ा झटका

प्रतीकात्मक

फेसबुक को आज भारत में बड़े स्तर पर लोग इस्तेमाल कर रहें हैं। फेसबुक का इस्तेमाल कुछ विज्ञापन एजेंसियां चुनाव प्रचार में भी करती हैं। अगले साल मई में लोकसभा चुनाव हैं। इसी के मद्देनजर फेसबुक ने अपनी विज्ञापन पॉलिसी ने बड़ा बदलाव किया है। फेसबुक ने विज्ञापन एजेंसियों तथा व्यक्तिगत विज्ञापनदाताओं को ई मेल लिखकर यह कहा है कि वह ऐसे लोगों की आइडेंटी तथा एड्रेस प्रूफ भेजें। दिए गए इस प्रूफ को उनकी भारतीय टीम जाकर वेरिफाई करेगी। आपको बता दें की आज से पहले फेसबुक की और से विज्ञापनदाओं को एक वेरिफिकेशन कोड भेजा जाता था। कोड वेरिफिकेशन होने के बाद विज्ञापन को फेसबुक की और से प्रकाशित कर दिया जाता था। फेसबुक के इस नियम की बजह से अब काफी समय विज्ञापन देने वालों को मिलेगा। फेसबुक का कहना है की वह चुनावों में शुचिता कायम करना चाहती है और इसके लिए फेसबुक की टीम काफी गंभीर है। असल में चुनावों के दौरान कई लोग भ्रमित करने वाले विज्ञापन दे सकते हैं अतः चुनावों में पारदर्शिता कायम करने के लिए फेसबुक ने यह कदम उठाया है। भारत में फेसबुक के करीब 29.4 करोड़ यूजर्स हैं। इससे समझा जा सकता है की भारत के लोकसभा चुनावों में फेसबुक कितना बड़ा प्रभाव डाल सकती है। भारत से पहले फेसबुक युनाइटेड किंगडम, अमेरिका तथा ब्राजील में भी इस प्रकार का नियम जारी कर चुका हूं। 

कैंब्रिज एनालिटिका भी है कारण - 

प्रतीकात्मक

भारत के चुनाव आयोग की एक चिंता यह भी है की फेसबुक का विवाद किसी से छुपा नहीं है। ब्रिटिश कंपनी कैंब्रिज एनालिटिका भी इस प्रकार के विवाद में फंस चुकी है। इस कंपनी पर आरोप था की यह अपने यूजर्स की डिटेल का उपयोग चुनावों के लिए करती है। यह भी कहा गया था कि इस कंपनी ने फेसबुक से करोड़ों यूजर्स का डाटा लीक कर कई देशों में चुनावों को प्रभावित किया था। यह मामला काफी ज्यादा उछला था जिसके चलते कैंब्रिज एनालिटिका के सीईओ को अपने पद से इस्तीफ़ा देना पड़ा था तथा बाद में कंपनी को भी अपने कारोवार को समेटने का एलान करना पड़ा। इस मामले में फेसबुक के मार्क जकरबर्ग को भी यूजर्स से माफ़ी मांगनी पड़ी थी। एक दूसरा तथ्य यह भी है की फेसबुक पहली बार वोट डालने वाले युवाओं पर बड़ा असर डालता है। इस बार के लोकसभा चुनाव में करीब 1 करोड़ युवा पहली बार वोट डालेंगे। इतनी बड़ी संख्या को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है क्यों की भारत में बड़ी संख्या में युवाओं के पास फेसबुक अकाउंट हैं। इस प्रकार से कैंब्रिज एनालिटिका मामले तथा भारत में युवा लोगों की फेसबुक पर ज्यादा सक्रियता को देखते हुए फेसबुक ने आइडेंटी तथा एड्रेस प्रूफ का नियम लागू किया है।