+

'गली का जादूगर' कैसे बन गया आज राजस्थान का ‘मुख्यमंत्री’

प्रतीकात्मक

अशोक गहलोत..., राजनीती का एक कद्दावर नेता। न तो किसी नेता का बेटा और न ही भाषणों के कोई प्रखर वक्ता। उनका सौम्य व्यवहार और उनकी बेदाग छवि ही है जो उन्हें तीसरी बार मुख्यमंत्री की कुर्सी तक ले गयी। कभी अपने जादूगर पिता के साथ जादू करने वाला, आज राजस्थान में कांग्रेस का सबसे बड़ा चेहरा बन चुका है। पिता भले ही कोई नामी जादूगर न रहे हों, लेकिन उनका जादू आज पुरे राजस्थान के सिर चढ़कर बोल रहा है। समाज सेवा से राजनीती में दाखिल हुए ये नेता केवल कांग्रेस की ही पसंद नहीं हैं, बल्कि विरोधी भी इनके अंदाज के कायल हैं। तीसरी बार मुख्यमंत्री बनने से राजस्थान की राजनीती में अशोक गहलोत के कद का अंदाजा लगाया जा सकता है। 

कभी करते थे ‘जादूगरी’ 

अशोक गहलोत के पूर्वजों का पेशा जादूगरी का था। उनके पिता स्व. श्री लक्ष्मण सिंह गहलोत भी एक जादूगर थे। अशोक गहलोत के करीबियों द्वारा कहा जाता है कि कुछ समय के लिए उन्होंने भी इस पेशे को अपनाया था। लेकिन उनके भाग्य में तो राजस्थान के मुख्यमंत्री की कुर्सी लिखी हुई थी। 

प्रतीकात्मक

'समाजसेवी' अशोक गहलोत

अशोक गहलोत का जन्म 3 मई 1951 को राजस्थान के जोधपुर में हुआ। राजनीती से पहले गहलोत एक समाज सेवी के तौर पर काम करते थे। उन्होंने 1968 से 1972 तक 'गाँधी पीस फाउंडेशन' से जुड़कर समाज सेवा की। इसी दौरान 1971 में 20 साल के अशोक गहलोत ने बांग्लादेशी शरणार्थियों के शिविर में जाकर भी सेवा की। 

राजनीती में शुरुवात

प्रतीकात्मक

राजनीती की शुरुवात में अशोक गहलोत कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई से जुड़े। 1977 में अपने पहले विधान सभा चुनाव में गहलोत हार गए थे। इसके बाद 1980 में पहली बार जोधपुर से जीतकर संसद पहुंचे। 1984 के चुनाव में भी जोधपुर की जनता ने सांसद के रूप में गहलोत को ही चुना। लेकिन 1989 के चुनाव में उन्हें बीजेपी के जसवंत सिंह के हाथों हार का मुँह देखना पड़ा। इसके बाद फिर जीत की गाडी पर सवार होकर गहलोत 1991,96 और 98 के चुनाव में जोधपुर से जीते।

दो बार रह चुके हैं मुख्यमंत्री

प्रतीकात्मक

इसी दौरान कांग्रेस के बड़े नेताओं की नज़र में आ चुके थे। कांग्रेस राजनीती में शानदार प्रदर्शन कर रहे गहलोत को पहले केंद्रीय मंत्री बनाया गया। उन्हें इंदिरा गाँधी, राजीव गाँधी और नरसिम्हा राव के मंत्री मंडल में जगह मिली। इसके बाद गहलोत 1998 से 2003 और फिर 2008 से 2013 तक राजस्थान के मुख्यमंत्री भी रहे। 

गहलोत अपनी छवि को लेकर बेहद सजग रहते हैं। इसीलिए वो विवादित भाषणों से भी दूर रहते हैं। वह हमेशा ही राजस्थान में गाँधी परिवार की पहली पसंद रहे हैं। हालाँकि इस बार 2018 विधान सभा चुनाव के बाद जब कांग्रेस की सरकार बनने की बात आयी, तो गहलोत के मुख्यमंत्री बनने पर मामला कुछ उलझ सा गया था। लेकिन अंत में इस बार भी गहलोत पर ही भरोशा जताया गया, और गहलोत को तीसरी बार राजस्थान का मुख्यमंत्री बना दिया गया।