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'भूपेश बघेल का सियासी दांव', कैसे बने मुख्यमंत्री?

प्रतीकात्मक

2018 के विधान सभा चुनाव में कांग्रेस को प्रचंड बहुमत तो मिला, लेकिन मुख्यमंत्री की दावेदारी पर काफी देर तक पेंच फंसा रहा। चार मुख्यमंत्री उम्मीदवारों के नाम पर लम्बी चर्चा के बाद भूपेश बघेल को छत्तीसगढ़ का मुख्यमंत्री बना दिया गया है। 15 वर्षों बाद कांग्रेस छत्तीसगढ़ की सत्ता में वापस लौट रही है। वैसे मध्य प्रदेश और राजस्थान में भी बहुमत सिद्ध करने के बाद कांग्रेस के मुख्यमंत्री उम्मीदवार पर काफी संशय रहा, लेकिन दोनों राज्यों में जल्द ही कांग्रेस को मुख्यमंत्री चेहरा मिल गया था। 

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छत्तीसगढ़ में जीत का श्रेय?

   छत्तीसगढ़ में कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष पद संभाल रहे भूपेश बघेल को अब मुख्यमंत्री पदभार दे दिया गया है। छत्तीसगढ़ में पूर्ण बहुमत से जीतने का श्रेय भी बघेल को ही दिया जा रहा है। क्योंकि वो इस चुनाव में छत्तीसगढ़ से कांग्रेस की बागडोर संभाल रहे थे। बघेल कांग्रेस के एक अनुभवी नेता हैं। छत्तीसगढ़ में पिछड़ा वर्ग सबसे अधिक संख्या में है और किसान परिवार में जन्मे भूपेश बघेल ओबीसी वर्ग से ही सम्बन्ध रखते हैं। शायद इसी कारण भूपेश बघेल को छत्तीसगढ़ का मुख्यमंत्री भी चुना गया। 

राजनीती में कैसे बढ़ा कद?

   2013 में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के दौरान झीरम घाटी में हुए नक्सली हमले में 32 कांग्रेसी नेता व कार्यकर्ता मारे गए थे। इस घटना में छत्तीसगढ़ के बड़े-बड़े कांग्रेसी नेता मारे गए थे। इन हालातों के बाद भूपेश बघेल का कद छत्तीसगढ़ की राजनीती में काफी बढ़ गया था। घटना के बाद भूपेश बघेल को छत्तीसगढ़ में कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। लेकिन कुछ महीने बाद ही प्रदेश में विधानसभा चुनाव थे। कांग्रेस ने इन चुनावों में बीजेपी को कड़ी टक्कर दी, लेकिन सरकार बनाने में असफल रही और प्रदेश में फिर बीजेपी की सरकार बन गयी। 

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कैसे पड़े बीजेपी पर भारी?

  इसके बाद भूपेश छत्तीसगढ़ में टूटी फूटी कांग्रेस को समेटने में लग गए। धीरे-धीरे बघेल ने कांग्रेस के संगठन को मजबूत किया और विपक्ष में रहकर भी बीजेपी सरकार के खिलाफ खूब आंदोलन किये। इस दौरान बघेल पर कुछ मुक़दमे भी दर्ज हुए, एक मुक़दमे में तो उन्हें जेल भी जाना पड़ा। इस बात से जहां कांग्रेस पर सवाल खड़े हो सकते थे, वहीँ बघेल ने जेल जाने से पहले कह दिया कि 'मैं निर्दोष हूं और मैं जेल में सत्याग्रह करूँगा।' कोर्ट में पेशी हुई तो बघेल ने वकील भी नहीं किया। जिसके बाद बघेल जेल में सत्याग्रह करते रहे और कांग्रेसी कार्यकर्ता सड़कों पर सरकार के खिलाफ नारे लगाते गए। इससे बीजेपी सरकार के खिलाफ माहौल बन गया। जिसका नतीजा 2018 में कांग्रेस को प्रचंड बहुमत के रूप में मिला। इस बेहतरीन जीत के लिए कांग्रेस आलाकमान ने बघेल को इनाम के तौर पर मुख्यमंत्री की कुर्सी भेंट