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क्रिश्चियन मिशेल का भारत आना,कर सकता है कांग्रेस के लिए नयी मुशीबतें खड़ी।

वर्तमान में कांग्रेस पार्टी केंद्र की भाजपा सरकार के खिलाफ राफेल डील को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रही है। वहीँ दूसरी और अगस्ता वेस्टलैंड सौदे ने केंद्र सरकार को कांग्रेस के ऊपर हावी होने का पूरा मौका दे दिया है। हालही में इस सौदे के मुख्य बिचौलिये क्रिश्चयन मिशेल को भारत लाया गया है। केंद्र सरकार तथा खुद पीएम मोदी भी इस मामले में कांग्रेस के शामिल होने के कई खुलासो का दावा करते नजर आ रहें हैं। लोगों का मानना है की क्रिश्चयन मिशेल जांच के दौरान कई बड़े नेताओं तथा नौकरशाहों के नाम खोल सकता है। यदि ऐसा होता है तो कांग्रेस पर केंद्र सरकार नए सिरे से हावी हो सकती है। सबसे पहले हम आपको क्रमवार बताते हैं इस पूरे मामले के बारे में।  

नए हेलीकॉप्टर खरीदने के सुझाव से शुरू हुआ था प्रकरण

 

बात उस समय कि है जब केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार थी। यह वह समय था जब भारत तथा राज्य सरकार के VVIP लोग वायुसेना के MI-8 हेलिकॉप्टर्स का इस्तेमाल किया करते थे। लेकिन इन हेलिकॉप्टर्स कि तकनीक पुरानी हो चुकी थी। इसको देखते हुए अगस्त 1999 में भारतीय वायु सेना ने MI-8 चॉपर को बदलने का सुझाव दिया। सरकार ने इस सुझाव पर अमल भी करना प्रारंभ कर दिया था। इसके तहत मार्च 2002 में दुनियाभर की कंपनियों को हेलीकॉप्टर खरीदने के लिए बोली लगाने को आमंत्रित किया गया था। इस प्रोग्राम में 4 वेंडर्स ने अपनी रूचि दिखाई थी तथा सरकार को यूरोकॉप्टर EC-225 हेलीकॉप्टर ज्यादा जंच रहा था। असल में यह 6 हजार मीटर तक की उड़ान भर सकता था। 

यहां से शुरू हुआ था कांग्रेस का कार्य

 

2005 में UPA-1 सरकार ने हेलीकॉप्टर खरीदने की कवायद शुरू की। इसके लिए कांग्रेस सरकार ने नए हेलिकॉप्टर्स की तकनीकी शर्तों में कुछ बदलाव किया। इसके बाद में मनमोहन सरकार ने इस डील में "इंटीग्रिटी क्लॉज़" को भी जोड़ा। जिसका मतलब था कि इस डील में यदि कोई दलाल पाया गया तो डील रद्द कर दी जाएगी। यही वह कारण था जिसकी वजह से अगुस्टा-वेस्टलैंड डील विवाद का कारण बन गई। 

सितंबर 2006 में 12 नए हेलीकॉप्टर खरीदने के लिए सरकार कि और से टेंडर निकाला गया। फरवरी 2010 में कैबिनेट कमिटी के इस 12 हेलीकॉप्टर खरीदने की बात को मंजूरी दे दी गई। उस समय इसका ठेका अगुस्टा वेस्टलैंड को करीब 3,546 करोड़ रुपए में दिया गया था। यहां आपको बता दें की इसकी पैरंट कंपनी फिनमैकेनिका का हेडक्वॉर्टर इटली में स्थित है। 

फरवरी 2012 में सामने आई दलाली की बात 

 

 

फरवरी 2012 में जांच एजेंसियों ने इस डील को लेकर दलाली की बात कही थी। जांच एजेंसियों का कहना था की फिनमैकेनिका कंपनी ने भारत सरकार से हेलीकॉप्टर का ठेका लेने के लिए भारत के कुछ अधिकारियों तथा वायुसेना के कुछ लोगो को करीब 360 करोड़ रुपये दिए थे।  खुलासा होने पर इटली की एजेंसियों ने भी तीन दलालों गुइदो हाश्के, क्रिश्चियन मिशेल तथा कार्लो गेरोसा के शामिल होने की बात कही थी। इसके बाद मार्च 2013 में इस मामले कि जांच CBI को सौंप दी गई। CBI ने पूर्व वायुसेना प्रमुख एसपी त्यागी तथा उनके भाइयों सहित कुल 9 लोगों पर केस दर्ज किया हालांकि अभी तक इस जांच में किसी नेता या अधिकारी का नाम सामने नहीं आया है। 

यूपीए टू ने लोकसभा चुनावों से पहले रद्द की डील

जनवरी 2014 में यूपीए टू सरकार ने लोकसभा चुनाव से कुछ पहले ही इस डील को रद्द कर दिया था। लेकिन जो धनराशि भारत सरकार कि और से जा चुकी थी उसकी भरपाई के लिए अगुस्टा वेस्टलैंड के द्वारा दाखिल कि गई बैंक गारंटी को भुनाया गया। आपको बता दें की रक्षा मंत्रालय ने इस डील के लिए 30% रकम अडवांस जमा कि थी। अक्टूबर 2014 में इटली कि निचली अदालत की और से स्पैग्नोलिनी तथा ओरसी को 2 वर्ष कि कैद की सजा सुनाई गई तथा उन पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों को माफ़ कर दिया गया। अप्रैल 2016 में इटली की मिलान कोर्ट ने निचली कोर्ट के फैसले को पलट दिया तथा स्पैग्नोलिनी को चार वर्ष तथा ओरसी को साढ़े चार वर्ष कि सजा सुनाई। दूसरी और इटली के प्रॉसिक्यूटर्स को यूपीए टू सरकार ने अहम दस्तावेज तथा सबूत नहीं दिए थे। इस मामले में पूर्व वायुसेना प्रमुख एसपी त्यागी को दोषी पाया गया था। 

भारत लाया गया मिशेल

फरवरी 2017 में  UAE में क्रिश्चयन मिशेल को गिरफ्तार कर लिया गया। यह अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर डील के मुख्य बिचौलियों में से एक है। इसके बाद से भारत इसके प्रत्यर्पण की लगातार कोशिश कर रहा था। CBI ने अपनी जांच में यह भी बताया की इस डील के दौरान क्रिश्चयन मिशेल करीब 25 बार भारत आया था। दुबई के एक कोर्ट ने मिशेल को भारत को प्रत्यार्पण करने के लिए सितंबर 2018 का समय दिया था लेकिन बाद में कोर्ट को पता लगा कि वह अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर डील का भी आरोपी रहा है। मिशेल ने बाद में यह माना कि इटली कि कई कंपनियों ने भारत में "काम" कराने के लिए उसको  4.86 करोड़ डॉलर दिए थे। इसके बाद भारत की कोशिशें रंग लाई और मिशेल को 4 दिसंबर 2018 को भारत लाया गया। अब CBI उससे पूछताछ कर रही है।