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काल भैरव मंदिर - एक अनसुलझा रहस्य

भारत एक ऐसा देश है जहां धर्म और मान्यताओं पर सबसे ज्यादा विश्वास किया जाता है। भारत में बहुत से मंदिर, मस्जिद, गुरूद्वारे और चर्च हैं। जिनमें रोज़ाना सैकड़ों-हज़ारों श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं लेकर आते हैं। इनमें से कई ऐसी रहस्यमयी जगह हैं। जिनके पीछे का रहस्य ही लोगों की अटूट विश्वास का कारण बना हुआ है। इनके पीछे का रहस्य न जानने के कारण वैज्ञानिक भी हैरान हैं। मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर में एक ऐसा ही रहस्यमयी मंदिर है, जिसके पीछे के रहस्य को सुलझाने के लिए वैज्ञानिकों ने शोध भी किया। लेकिन वैज्ञानिकों के हाथ कुछ नहीं लगा। अंतत: ये रहस्य वैज्ञानिकों की भगवान के प्रति अटूट श्रद्धा में परिवर्तित हो गया। 

मंदिर का इतिहास - 

उज्जैन शहर से 5 किलोमीटर दूर भैरव गढ़ में भगवान शिव के उग्र और तेजस्वी रूप श्री काल भैरव का मंदिर है। इस मंदिर को 6000 साल पुराना माना जाता है। कहा जाता है कि प्राचीन समय में यहां सिर्फ तांत्रिकों को जाने दिया जाता था लेकिन बाद में इसे आम लोगों के लिए भी खोल दिया गया। कुछ साल पहले तक यहां जानवरों की बलि भी दी जाती थी, लेकिन अब इस प्रथा को भी बंद कर दिया गया। कहते हैं ब्रह्मा जी के पांचवे शीश का खंडन भैरव ने ही किया था। 

क्या है ये रहस्य -

 इस मंदिर के बाहर दुकानों पर फूल और श्रीफल के साथ-साथ प्रसाद के तौर पर मदिरा भी दी जाती है। इस जगह पर मदिरा को ‘वाईन’ बोला जाता है। जब भक्त मंदिर में प्रवेश करते हैं तो मनोकामना पूरी हो इसके लिए काल भैरव की मूर्ति को फूल और श्रीफल के साथ-साथ वाईन भी चढ़ाते हैं। मंदिर के पुजारी सभी भक्तों द्वारा चढ़ाई गई वाईन को एक-एक करके प्लेट में निकालते हैं और प्लेट को बाबा की मूर्ति के मुँह से लगाते हैं। देखते ही देखते प्लेट में रखी पूरी वाईन गायब हो जाती है। अब मान्यता यह है कि भगवान काल भैरव ही वाईन को प्रसाद के रुप में ग्रहण करते हैं। 

रहस्य पर शोध -

 माना जाता है कि इस रहस्य को सुलझाने के लिए एक अंग्रेज़ अधिकारी ने शोध करना चाहा। इसके लिए अधिकारी ने मूर्ति के चारों और खुदाई भी करवाई। लेकिन जब अधिकारी इस रहस्य के बारे में कुछ ना जान सका तो वह खुद भी बाबा का भक्त बन गया। तब से ही यहां पर शराब को वाईन उच्चारित किया जाता है। इस मंदिर में मूर्ति को सदियों से वाईन चढ़ाई जा रही है, लेकिन ये प्रथा कब शुरू हुई कोई नहीं जानता।