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विधानसभा भंग, अब चुनाव के बाद ही बनेगी नई सरकार

पीडीपी—बीजेपी गठबंधन की सरकार से बीजेपी के अलग होने के बाद 16 जून से राष्ट्रपति शासन वाले राज्य जम्मू कश्मीर में अब विधानसभा चुनाव के बाद ही नई सरकार बनेगी। वहां नई सरकार बनाने की तमाम कोशिशों के नाकाम होने के बाद राज्यपाल ने 21 नंवबर को विधानसभा भंग कर दी। 

हालांकि पीडीपी ने कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस के सपोर्ट से और पीपल्स कॉन्फ्रेंस के सज्जाद लोन ने बीजेपी के सपोर्ट से सरकार बनाने का दावा पेश किया था। फिर भी दोनों गठबंधन राज्यपाल को सफल सरकार बनाने का भरोसा नहीं दिला सके। अंतत: राज्यपाल ने विधानसभा भंग कर दी। 

पिछले कुछ समय से जम्‍मू कश्‍मीर में एक तरफ आतंकी गतिविधियों फिर से सिर उठाने लगी थीं, दूसरी तरफ राजनीतिक उथलपुथल मची हुई थी। बीजेपी के खिलाफ पूरा विपक्ष एकसाथ आकर सरकार बनाने की तैयारी में था, लेकिन उनकी यह रणनीति भी काम नहीं आ पाई। पीडीपी ने नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस के साथ जैसे ही सरकार बनाने का दावा पेश किया पीपल्स कॉन्फ्रेंस के सज्जाद लोन ने भी अपना दावा पेश कर दिया।

पीडीपी की महबूबा मुफ्ती का दावा था कि उनके पास 56 विधायकों का समर्थन है, तो 21 नवंबर की रात 8.30 बजे सज्जाद लोन ने भी सरकार बनाने का दावा पेश करते हुए कहा कि पीडीपी के 18 विधायक उनके साथ हैं। संभवत: बात यहीं बिगड़ गई। अभी यह कयास लगाए ही जा रहे थे कि सरकार बनाने का मौका किसे मिलेगा? तब तक जम्मू-कश्मीर के गवर्नर सत्यपाल मलिक ने विधानसभा भंग कर दी।

इस तरह से जम्मू-कश्मीर विधानसभा भंग होने के बाद अब राज्य में किसी भी पार्टी को सरकार बनाने का मौका तभी मिलेगा जब विधानसभा चुनाव जीतकर पूर्ण बहुमत वाले विधायकों की संख्या प्रस्तुत करेंगे।

राज्य में अब चुनाव कराए जाएंगे। राज्यपाल के इस फैसले से विपक्षी पार्टियों में आक्रोश है। नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला का कहना है कि पिछले 5 महीनों से हम विधानसभा भंग करने की मांग कर रहे थे तब यह फैसला नहीं लिया गया। आज हमने जैसे ही सरकार बनाने का दावा पेश किया विधानसभा भंग कर दी गई।

वहीं पीडीपी की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती का कहना है, 'अगर हमें मौका मिलता तो हम अपने नंबर साबित करते।' इससे पहले उन्होंने राज्यपाल को भेजे लेटर में लिखा था, 'मीडिया में आई खबरों से आपको यह पता चल गया होगा कि कांग्रेस और NC ने PDP को सपोर्ट करने का फैसला किया है।'

पीडीपी के दावा पेश करने के कुछ ही देर बाद ही पीपल्स कॉन्फ्रेंस के सज्जाद लोन ने भी सरकार बनाने का दावा करते हुए गवर्नर को लेटर भेज दिया था। पहले जहां पीडीपी ने सरकार बनाने के दावा पेश किया था, वहीं सज्जाद लोन की पार्टी जम्मू-कश्मीर पीपल्स कॉन्फ्रेंस ने भी बीजेपी के समर्थन से राज्य में सरकार बनाने का दावा कर दिया।

पीडीपी के बागी नेता इमरान अंसारी का दावा था कि पार्टी के 18 विधायक उनके साथ हैं। इससे पहले यह खबर आई थी कि पीडीपी के नेता मुजफ्फर बेग भी सज्जाद लोन के समर्थन में आ गए हैं।

महबूबा मुफ्ती की पार्टी पीडीपी के सीनियर नेता अल्ताफ बुखारी को सीएम बनाने का फैसला भी कर लिया था। इस बात की जानकारी पीडीपी की बैठक के बाद अल्ताफ बुखारी ने दी थी।

बहरहाल, राज्य में फिलहाल राज्यपाल शासन है। 19 दिसंबर को राज्यपाल शासन की 6 महीने की मियाद पूरी हो रही है। इसे और अधिक बढ़ाया नहीं जा सकता है। इसे देखते हुए राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने 87 सदस्यीय विधानसभा को भंग नहीं करने का फैसला किया है।