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चर्चा में चौटाला परिवार, निकाले गए अजय चौटाला पार्टी से।

राजनीति में परिवारवाद का एक बड़ा उदाहरण चर्चित चौटाला परिवार भी रहा है। हरियाणा में इंडियन नेशनल लोकदल(इनेलो) की भूमिक राज्य से लेकर राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण बनी रही है। इसके संस्थापक देवीलाल हरयाणा के मुख्यमंत्री और भारत के उप प्रधानमंत्री तक रह चुके हैं। आज एक बार फिर उनकी याद लोगों को तब ताजा हो गई, जब उनके पौत्र अजय सिंह चौटाला को पार्टी से निष्काष्ति कर दिया गया।

इसकी घोषणा शिक्षक नियुक्ति घोटाले में दिल्ली के तिहाड़ जेल में बंद उनके पिता ओम प्रकाश चौटाला द्वारा ही की गई। इनेलो के हरियाणा प्रभारी अशोक अरोड़ा ने चंडीगढ़ में अजय सिंह चौटाला के छोटे भाई अभय सिंह चौटाला की मौजूदगी में इस फ़ैसले की घोषणा की।

उनपर 'पार्टी विरोधी गतिविधियां' करने का आरोप लगाया गया।अशोक अरोड़ा ने मीडिया के सामने दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद ओम प्रकाश चौटाला की चिट्ठी पढ़कर सुनाई। चिट्टी में ही अजय सिंह चौटाला की प्राथमिक सदस्यता रद्द करने का फ़ैसला लिखा हुआ था।

इससे पहले ओम प्रकाश चौटाला ने अजय सिंह चौटाला के बेटों, दुष्यंत सिंह चौटाला और दिग्विजय सिंह चौटाला को भी 2 नंवबर को पार्टी से निकाल दिया था। इसे अजय चौटाला के पार्टी से निष्काषित बेटे राजनीतिक साजिश बता रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि चौटाला परिवार की जड़ें राजस्थान से जुड़ी हैं, लेकिन हरियाणा में सिरसा का चौटाला गांव इस परिवार के कारण जाना जाता है। इनोलो हरियाणा विधानसभा में मुख्य विपक्षी पार्टी है, जिसकी स्थापना ओम प्रकाश चौटाला के पिता देवी लाल ने की थी।

देवी लाल साल 1971 तक कांग्रेस में रहे और वे दो बार हरियाणा के मुख्यमंत्री भी रहे।

वर्ष 1977 में देवीलाल जनता पार्टी में आ गए और 1987 में लोकदल के साथी बन गए, लेकिन जल्द ही उन्होंने अपनी पार्टी इनेलो बना ली।  वे 1989 में  उप-प्रधानमंत्री बनाए गए। उनकी हरियाण के ग्रामीण मतदाताओं का भरपूर समर्थन मिलता रहा। इसका लाभ उनके बड़े बेटे ओम प्रकाश चौटाला को भी मिला और वे इसी बूते हरियाणा के तीन बार मुख्यमंत्री बने। बाद में ओपी चौटाला इनेलो के राष्ट्रीय अध्यक्ष बन गए।

हालांकि ओम प्रकाश चौटाला पर प्रदेश में शिक्षकों की भर्ती का आरोप लगा और इसके दोषी पाए जाने पर बेटे अजय सिंह चौटाला के साथ उन्हें भी 10 साल के लिए जेल की सजा हो गई। इन दिनों दोनों पेरोल पर जेल से बाहर हैं।

  चौटाला परिवार के भीतर आए विवाद से उनके समर्थक हैरान हैं। चिंतित हैं कि पार्टी की कमान किसके हाथ में जाएगी? चिंता स्वाभाविक है क्योंकि सबकी नजर आगामी लोकसभा चुनाव पर टिकी हुई है।