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2018 के विधान सभा चुनाव में होने वाला है घमासान, बदल सकतीं हैं सरकारें।

विधानसभा चुनाव 2018: इस साल पाँच राज्यों मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, तेलंगाना और मिजोरम में विधान सभा चुनाव होने वाले हैं। चुनाव आयोग पांच राज्यों में चुनाव की तारीखों की घोषणा कर चुका है। चुनाव की तारीखों की घोषणा के साथ ही चुनाव आयुक्त ने कहा कि सभी चुनावों में नई वीवी पैट मशीन इस्तेमाल में लायी जाएगी। साथ ही चुनाव निष्पक्ष हो इसके लिए हर चुनाव बूथ पर सुरक्षा बलों की तैनाती की जाएगी। बहुत से सर्वे के अनुसार इस बार आंकड़े पलटते दिख रहें हैं। राज्यों में काबिज पार्टी की सरकारों को कुर्सी छोड़नी पड़ सकती है। लेकिन बहुत बार पहले से लगे अनुमान अक्सर मतगणना के दिन बदलते भी दिखे हैं। पांचो राज्यों में मतगणना 11 दिसंबर को होगी। आइये हर राज्य में चुनाव की तारीखों और वहाँ की स्थिति पर एक नज़र डालते हैं। 

मध्य प्रदेश: चुनाव आयोग द्वारा मध्य प्रदेश में विधान सभा चुनाव की तारीख की घोषणा हो चुकी है। यहाँ कुल 230 विधानसभा सीटों पर 28 नवम्बर को मतदान होना है। 2013 में बीजेपी ने यहाँ 230 में से 165 सीट पर बहुमत पाकर सरकार बनायी थी। वर्तमान में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान हैं। जो PSE सर्वे के अनुसार मुख्यमंत्री के रूप में अभी भी एमपी की जनता की सबसे पहली पसंद हैं। लेकिन इस बार के चुनाव में यहाँ कांग्रेस और बीजेपी में कांटे की टक्कर मानी जा रही है। क्यूंकि बीजेपी के टिकट वितरण से नाराज़ बीजेपी के कुछ नेता विपक्ष के साथ जाकर खड़े हो रहे हैं। फिर भी विपक्ष में फूट के कारण बीजेपी की स्थिति अन्य पार्टी के मुकाबले ठीक है। अगर कांग्रेस और बीएसपी का गठबंधन हो जाता तो बीजेपी की हार की सम्भावना अधिक होती। एमपी में बीएसपी का वोट शेयर 6 फीसदी है।

राजस्थान: राजस्थान की 200 विधान सभा सीटों पर मतदान 7 दिसम्बर को होगा। वर्तमान में वसुंधरा राजे यहाँ की मुख्यमंत्री हैं। साल 2013 में बीजेपी ने 200 में से 163 सीटों पर जीत हासिल कर यहाँ सरकार बनायी थी। जिसमे कांग्रेस को केवल 21 सीटें मिली थी। लेकिन PSE सर्वे के मुताबिक इस बार राजस्थान के चुनावी आंकड़े पलटते दिख रहे हैं। जिसमे केवल 39 प्रतिशत जनता ही दोबारा वसुंधरा राजे को मुख्यमंत्री बनाना चाहती है जहाँ 43% जनता सरकार बदलने के पक्ष में हैं। इस सर्वे के अनुसार यहाँ बीजेपी के हाथ से सरकार निकलती दिख रही है। जहाँ राजस्थान की जनता राज्य में सरकार बदलना चाहती है वहीँ केंद्र में अभी भी प्रधानमंत्री मोदी उनकी पहली पसंद हैं।

तेलंगाना: तेलंगाना में भी 7 दिसम्बर को ही वोट डाले जायेंगे। PSE सर्वे के मुताबिक 44% जनता फिर से के. चन्द्रशेखर राव के नेतृत्व में टीआरएस पार्टी की सरकार ही चाहते हैं। वहीँ 34% जनता बदलाव चाहती है। यहाँ कुल 119 विधान सभा सीटों पर चुनाव होने हैं। तेलंगाना राष्ट्र समिति पार्टी (टीआरएस) की जीत की सम्भावना 75% लग रही है। कांग्रेस का टीडीपी के साथ गठबंधन भी कुछ कमाल करता नहीं दिख रहा। सर्वे में मुख्यमंत्री के रूप में के. चन्द्रशेखर राव (केसीआर) बहुत बड़ी बढ़त  बनाए हुए हैं। वहीँ बीजेपी के विधायक का कहना है कि अगर बीजेपी की सरकार आती है तो हैदराबाद का नाम बदलकर भाग्यनगर रखा जायेगा। नाम बदलने की इस राजनीती से कितना फर्क पड़ता है ये तो चुनाव के नतीजे ही बताएँगे

छत्तीसगढ़: PSE सर्वे में छत्तीसगढ़ में एक बार फिर बीजेपी की सरकार बनती दिख रही है। इस से पहले यहाँ लगातार 3 बार बीजेपी की सरकार रह चुकी है। लगातार चौथी बार रमन सिंह सत्ता में वापिस आते लग रहे हैं। PSE के अनुसार 43% जनता इसके पक्ष में हैं जहाँ 41% जनता इसके पक्ष में नहीं है। यहाँ कुल 90 सीटों पर दो चरणों में वोट डाले जायेंगे। पहले चरण का मतदान नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की 18 सीटों पर 12 नवम्बर को होगा और अन्य सीटों पर चुनाव 20 नवम्बर को होंगे। पिछले कुछ दिनों में यहाँ हुए नक्सली हमलों को देखते हुए भारी संख्या में सुरक्षा बलों को तैनाद दिया गया है। जनता की मुख्यमंत्री की पसंद के रूप में रमन सिंह सबसे आगे हैं। PSE के मुताबिक 55% जनता उन्हें ही मुख्यमंत्री चाहती है।

 

मिजोरम: मिजोरम की 40 विधानसभा सीटों पर 28 नवम्बर को मतदान होने हैं। अब तक सत्ता पर काबिज कांग्रेस के लिए थोड़ी मुश्किलें दिख रही हैं। सर्वे के अनुसार कांग्रेस को 19 सीटें मिलती दिख रही हैं, जहाँ MNF जो की मिजोरम की लोकल पार्टी है, 14 सीटों पर जीतती दिख रही है। स्थिति ऐसी रही तो दोनों पार्टी अन्य विजेताओं को अपने साथ खींचने की कोशिश करेंगी।

    मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने चुनाव के ऐलान के साथ ही मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मिजोरम में 6 अक्तूबर से ही चुनाव की आचार संहिता लागू कर दी थी। सभी राज्यों में मतगणना 11 दिसम्बर को होनी है। ऐसे में देखना होगा की सर्वे कितने सही होते हैं। कौन सी पार्टी कुर्सी बचा सकती है और कौन सी पार्टी कुर्सी छीन सकती है। लेकिन एक बात तो तय है विधान सभा चुनाव के परिणामों का असर कुछ महीनों बाद होने वाले लोक सभा चुनाव पर  जरूर पड़ेगा। शायद यही कारण है कि इन चुनाव की रैलियों में सभी पार्टियों के बड़े बड़े नेता हिस्सा ले रहे हैं।