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स्टैच्यू आफ यूनिटी के दीदार से कमाई शुरू, तीन दिन की कमाई 1.26 करोड़

कहते हैं न हिंदुस्तान सपनों के साथ-साथ मजबूत इरादों का भी देश है। यहां यादों में लिपटी हुई जिंदगियां सपने बुनती है और उसी के सहारे अजीविका के साधन भी तलाश लेती है। ऐसा ही पिछले दिनों दुनिया में मान बढ़ाने वाली सबसे ऊंची सरदार वल्लभ भाई पटेल की प्रतिमा के साथ हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब इसके निर्माण की घोषणा की थी तब उन्होंने कहा था, ‘‘यह न सिर्फ देश का मान बढ़ाएगा, बल्कि इससे पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा और कमाई होगी।’’ तब 2990 करोड़ रुपये की लागत से बनी इस प्रतिमा पर होने वाले खर्च को लेकर काफी विरोधी आवाजें भी उठीं।

अब रोचक और महत्वपूर्ण बात यह है कि इसने भरपूर कमाई के द्वार खोल दिए हैं। मात्र तीन दिनों आठ, नौ और दस नवंबर को ही प्रतिमा के दीदार से सरकार को 1.26 करोड़ रुपये की आमदनी हुई है। गुजरात के नर्मदा नदी के तट पर केवडिया काॅलोनी में बनी 182 मीटर ऊंची सरदार बल्लभ भाई पटेल की स्टैच्यू आॅफ यूनिटी को देखने के लिए लोग उमड़ पड़े हैं। बड़ी संख्या देशभर से लोग वहां जा रहे हैं, जिसका अनावरण नरेंद्र मोदी ने 31 अक्टूबर को किया था।

इस नए और अजूबे पर्यटन स्थल को देखने के लिए गुजरात सरकार खूब प्रचारित कर रही है। इसके प्रति पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए टेलीविजन पर विज्ञापन करवाए जा रहे हैं। प्रतिमा के दर्शनीय गैलरी को सरकार द्वारा प्रतिदिन 6 हजार लोगों के विजिट करने की घोषणा के बावजूद इसके पर्यटक भारी संख्या में पहुंच रहे हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार विशाल प्रतिमा के अंदर बनी व्यूइंग गैलरी तक जाने वाले एलिवेटर की क्षमता 25 लोगों की है। इस तरह से वहां एक घंटे में 600 से 700 लोग ही पहुंच सकते हैं। गैलरी में एक साथ रहने की क्षमता 200 लोगों की है। इस हिसाब से एक दिन में गैलरी में मात्र 6 हजार लोग ही जा सकते हैं। इसकी बुकिंग आॅनलाइन हो रही है।

इसे देखने के लिए 1 नवंबर से खोला गया है। इस भव्य और विशालकाय प्रतिमा को देखने के अलावा लोग विजिटर सेंटर, सोवनियर शाॅप, प्रदर्शनी हाॅल, दर्शक दीर्घा आदि में जा सकते हैं। पर्यटन स्थल में प्रवेश और दर्शक दीर्घा के लिए वयस्क के टिकट की कीमत 350 रुपये है, वहीं तीन से 15 साल तक के बच्चों के लिए 200 रुपये का टिकट है। अगर व्यूइंग गैलरी तक नहीं जाना की स्थिति में 120 रुपये और 60 रुपये के टिकट हैं।

पर्यटन स्थल तक पहुंचने के लिए केवड़िया से विशेष बसें चलाई जा रही हैं, जो 30 रुपये प्रति यात्री लेकर उन्हे मूर्ति समेत नौ स्थानों वाले 19 किमी लंबे मार्ग से वापस ले आती है।  

पर्यटकों की भारी भीड़ के चलते यहां विशेष यातायात व्यवस्था भी लागू की गई है, जिसके तहत पर्यटकों अथवा बाहरी लोगों की कारों को केवड़िया में ही रोक दिया जाता है। दिवाली के बाद की छुट्टियों के चलते यहां गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान के अलावा देश के अन्य हिस्सों तथा विदेशों से भी पर्यटक आ रहे हैं। इसके पास ही फूलों की घाटी और टेंट सिटी भी बनाई गई है।

पर्यटकों की संख्या संख्या की तुलना में स्मारक की क्षमता को देखते हुए वहां आने की योजना की अपील करनी पड़ी है। उल्लेखनीय है कि सरदार पटेल ने भारत की आजादी के समय देश में 562 रियासतों इकट्ठा करने में अहम भूमिका निभाई थी। तब इसे काफी मुश्किल वाला काम माना गया था, इसलिए राजनेताओं ने उन्हें 'लौह पुरुष' की संज्ञा दी गई। उनकी प्रतिमा भी लोहे की बनाई गई है। रियासतों को एकसूत्र में बांधने के काम की वजह से उन्हें भारतीय एकता यानी ‘यूनिटी’ का प्रतीक माना जाता है। गुजरात विधानसभा में कुल 182 सीटें हैं, इसलिए पटेल  की 182 मीटर ऊंची मूर्ति बनाई गई।