+

मोदी-राहुल की तीखी जुबानी जंग

जैसे—जैसे लोकसभा चुनाव के दिन निकट आ रहे हैं, वैसे—वैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के बीच जुबानी जंग तेज होती जा रही है। दोनों एक—दूसरे पर तीखी टिप्पणी करने से नहीं चूकते हैं। कई बार एक—दूसरे पर सीमा लांघने जैसे आरोप भी लगा देते हैं। जिसमें हास्य के साथ—साथ फूहड़ता भी शामिल होती है। हाल में छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव के दौरान ऐसा ही कुछ देखने को मिला।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 9 नवंबर को छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में विधानसभा के चुनाव-प्रचार अभियान के तहत जगदलपुर की जनसभा को संबोधित किया। उन्होंने कांग्रेस पर टिप्पणी की। उसे 'शहरी माओवादियों' का समर्थन करने और झूठ फैलाने का आरोप लगा दिया।

इसका जवाब कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने उनपर सरकार की नाकामी छिपाने के आरोप  से दिया। उन्होंने छत्तीसगढ़ में कांकेर की एक रैली में कहा,'' प्रधानमंत्री 2014 में युवाओं और किसानों को किए गए अपने वादे भूल चुके हैं और अब वह इन वादों को पूरा करने में सरकार की नाकामी को छिपाने के लिए माओवाद की बात कर रहे हैं।''

छत्तीसगढ़ में ही अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने कहा,'' भाजपा का मंत्र विकास है, जबकि कांग्रेस पार्टी का मंत्र हमेशा झूठ बोलना है।''  

प्रधानमंत्री ने कांग्रेस पार्टी के राफेल लड़ाकू विमान सौदे में लगाए गए आरोपों पर भले ही कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, लेकिन कहा,'' कांग्रेस को झूठ बोलने में महारत हासिल है।''

उन्होंने कहा, ''कांग्रेस के नेता महलों में चांदी का चम्मच मुंह में लेकर पैदा हुए हैं और वे आदिवासियों की समस्याओं को नहीं समझ सकते हैं।''

कांकेर में राहुल ने तो प्रधानमंत्री को चौकीदार कहकर संबोधित किया और कहा, '' प्रधानमंत्री ने 2014 में लोगों से वादा किया था कि युवाओं के लिए एक साल में 2 करोड़ रोजगार के मौके तैयार किए जाएंगे, काला धन पर रोक लगेगी, सभी भारतीयों के खाते में 15 लाख रुपये जमा किए जाएंगे और किसानों को कर्जमाफी दी जाएगी, लेकिन अब वह इस पर बात नहीं करते, बल्कि वह माओवाद की बात करते हैं। पहले वह भ्रष्टाचार की बात करते थे, लेकिन अब वह ऐसा नहीं करते, क्योंकि 'चौकीदार चोर है!'...।''

 राहुल गांधी नोटबंदी और जीएसटी को लेकर भी तीखी टिप्पणी करने से नहीं चूकते हैं। जीएसटी को उन्होनं नया नामाकरण गब्बर सिंह टैक्स (जीएसटी) कर दिया है। अपने भाषण में उन्होंने सवाल किया,''क्या लोगों ने देखा कि अनिल अंबानी, ललित मोदी, विजय माल्या, मेहुल चोकसी और नीरव मोदी जैसे लोग नोटबंदी के दौरान कतार में खड़े हुए...जिनके पास काला धन था वह कतार में क्यों नहीं खड़े थे?... जबकि देश के मेहनती ईमानदार लोग कतार में खड़े रहने के लिए मजबूर क्यों हुए? मोदी अपने भाषणों में नोटबंदी और 'गब्बर सिंह टैक्स' का जिक्र क्यों नहीं करते?

राहुल गांधी ने कहा ''मोदी जानते हैं कि लोग उनके छलावे को समझ गए हैं और अगर वह नोटबंदी का जिक्र करेंगे तो लोग उन्हें मंच से उतार देंगे।''

उन्होंने लोगों को राफेल घोटाले के बारे में बताते हुए कहा,'' मोदी सरकार दो भारत का निर्माण करने में व्यस्त है, एक भारत जिसका ताल्लुक अमीरों से, जबकि दूसरे का गरीबों से है।''

राहुल ने कहा, ''अगर मोदी देश के 15 अमीरों का 3.5 लाख करोड़ रुपये का कर्ज माफ कर सकते हैं तो वह किसानों को कर्जमाफी क्यों नहीं दे सकते हैं?'