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इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट करने के बावजूद 10 हजार युवा बने नागा साधु

इन दिनों प्रयागराज में जोरों शोरों से कुम्भ का आयोजन हो रहा है। इस दौरान लाखों श्रद्धालु प्रयागराज में स्नान करने के लिए आ रहे हैं। देश विदेशों से भक्त, साधु-संत और कई नागा बाबा व महिला नागा साधु भी संगम में कुम्भ के मौके पर पहुंच रहे हैं। वहीँ कुंभ के चलते एक आंकड़ा भी सामने आ रहा है। जिसमें कई युवा, नागा साधु बनने की तरफ आकर्षित हो रहे हैं। बीते हफ्ते हुए दीक्षा समारोह में कई हजारों युवाओं ने अपने बाल त्यागे और खुद का पिंड दान करते हुए नागा साधु का जीवन स्वीकार किया। इस प्रक्रिया में रातभर चली अग्नि पूजा के बाद ये सभी युवा प्राचीन परंपरा के अनुसार संसार का त्याग कर नागा साधु बने। हैरान करने वाली बात तो यह है, कि ये युवा इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट से ग्रेजुएट होने के बावजूद नागा साधु बनना पसंद कर रहे हैं। 

प्रतीकात्मक

 

10 हजार युवा बने नागा साधु

बता दें कि इस दौरान सांसारिक मोह का त्याग कर इस कड़े जीवन को स्वीकार करने वाले पुरुषों और महिलाओं की संख्या करीब 10 हजार थी। इन लोगों ने अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद् (एबीएपी) के अंतर्गत साधु जीवन स्वीकार किया। ये परिषद् देश में हिन्दू संतों और साधुओं का सबसे बड़ा संगठन है। 

प्रयागराज में नागा साधु बनने आए 27 साल के रजत कुमार से जब उनके बारे में पुछा गया तो उन्होंने कहा कि 'उन्होंने कच्छ के मरीन इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया है। इसके लिए उन्हें अच्छी सैलरी मिलती लेकिन वे सब कुछ त्याग कर नागा साधु बने। वहीँ 29 वर्षीय शंभु गिरी ने यूक्रेन से मैनेजमेंट में ग्रेजुएशन किया है। वो भी कुम्भ के दौरान नागा साधु बने। इसके अलावा 18 वर्ष के घनश्याम गिरी भी नागा साधु बने, जो उज्जैन से 12वीं के टॉपर रह चुके हैं। 

प्रतीकात्मक

 

शाही स्नान करके स्वीकार किया नागा साधु का जीवन

सोमवार को नागा साधु बने इन सभी ने मौनी अमावस्या के मौके पर शाही स्नान किया। इन सभी ने संतो और महामंडलेश्वरों के साथ गंगा में डुबकी लगाई, जिसे लेकर उनमें बहुत ज्यादा आतुरता थी। वहीँ नागा सन्यासियों ने धूना के सामने बैठकर पूरी रात “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप किया और पवित्र भभूत भी तैयार की।