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आखिर कैसे बनती हैं महिला नागा साधु, जानें पूरी प्रक्रिया

कुंभ मेला दुनिया का सबसे बड़ा सांस्कृतिक तथा आध्यात्मिक मेला होता है। हालही में इस मेले में श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा ने 60 महिला नागा साधुओं को विधिवत दीक्षा दी है। इस घटना के बाद से देश में महिला नागा साधुओं पर चर्चा छिड़ चुकी है। हर कोई उस प्रक्रिया के बारे में जानना चाहते है। जिसके तहत महिला को नागा साधु बनाया जाता है। कुंभ के ही एक संत इस बारे में बताते हैं कि "अखाड़े के महात्मा पहले नागा बनने वाली महिला के इस जन्म तथा पूर्व जन्म के बारे में जानते हैं। उसके चरित्र तथा स्वभाव के बारे में पता किया जाता है। इसके बाद यह भी देखा जाता है कि नागा बनने वाली महिला आजन्म ब्रह्मचर्य से रह सकती है अथवा नहीं। सभी चीजें ठीक से पता लगाने के बाद ही महिला को नागा साधु की दीक्षा दी जाती है। 

प्रतीकात्मक

 

दीक्षा से पहले की आवश्यक शर्ते - 

महिला नागा साधुओं की पहचान भी ख़ास होती है। आपको बता दें की जिस प्रकार पुरुष नागा साधु नग्न रहते हैं महिला उस प्रकार नहीं रहती है। महिला नागा साधु गेरुए वस्त्र से अपने शरीर को ढके रहती हैं। इसके अलावा महिला नागा साधु बिना वस्त्र के शाही स्नान नहीं कर सकती हैं। उनको वस्त्र पहन कर ही स्नान करना होता है। जूना अखाड़े की महामंत्री शैलजा देवी बताती हैं कि पुरुष या महिला को नागा साधु बनने से पहले साधु का जीवन गुजारना पड़ता है। ,इसके बाद उनको लंबे समय तक कई प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है और अंत में इन लोगों को नागा साधु की दीक्षा दी जाती है। इसके बाद साधु बनने वाले लोगों को अपना अखाड़ा चुनना होता है तथा चुने गए अखाड़े के महामंडलेश्वर इन लोगों को दीक्षा देते हैं। नागा बनने वाली इन महिलाओं का मुंडन कराया जाता तथा अलग अलग पदार्थों से दशविधि से स्नान कराया जाता है। इसके बाद रात को विजया संस्कार होता है तथा मौनी अमावस्या पर इन सभी को शाही स्नान कराया जाता है। इस प्रक्रिया के बाद महिला नागा साधु बनती हैं।