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2019 बजट - मोदी सरकार की बड़ी चाल, अब क्या होगा विपक्ष का हाल?

शुक्रवार को मोदी सरकार ने अपने कार्यकाल का अंतिम अंतरिम बजट पेश किया। यह बजट अगले लोकसभा चुनाव से ठीक पहले था, इसलिए मोदी सरकार के पास जनता को लुभाने का बहुत अच्छा मौका था। संसद में इस बजट का एलान केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने किया। मोदी सरकार के लिए यह बजट कुछ ऐसा ही था, जैसे क्रिकेट मैच में आखिरी के ओवरों में ज्यादा रन बटोरने के लिए बैटिंग पॉवरप्ले दिया जाता है। और बजट में हुई घोषणाओं के आधार पर यह कहा जा सकता है, कि मोदी सरकार ने इस पॉवरप्ले का भरपूर फायदा भी उठाया। 

प्रतीकात्मक

 

लोकसभा चुनाव से पहले मोदी सरकार ने इस बजट के जरिए किसानों, मजदूरों, मिडिल क्लास और ग्रामीणों को साधने के लिए बड़े कदम उठाए हैं। सरकार ने बजट में जहां रूठे किसानों को मनाने के लिए जहां 6 हजार रुपये हर साल देने का ऐलान किया तो वहीं मजदूरों को कम से कम 3000 रुपये पेंशन देने की घोषणा की। साथ ही सरकार ने मिडिल क्लास के लिए टैक्स लिमिट भी बढ़ाई। जो टैक्स लिमिट पहले 2.5 लाख थी, उसे अब बढाकर 5 लाख कर दिया है। इससे अब 5 लाख तक की आय वाले लोगों को कोई टैक्स नहीं देना होगा। इसके अलावा इस बार ग्रामीण बजट में भी अच्छी खासी बढ़ोतरी की गई। लेकिन अब देखना ये होगा कि मोदी सरकार का यह अंतरिम बजट जो इतना लुभावना लग रहा है, वह आम आदमी और किसानों के जीवन पर क्या प्रभाव डालेगा। 

प्रतीकात्मक

 

बजट में गाय पालन को भी बढ़ावा 

देखा गया है कि जबसे मोदी सरकार सत्ता में आई है, देश में गाय एक बड़ा मुद्दा रहा है। यहां तक की केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने बजट में भी गाय को विशेष महत्व दिया है। मोदी सरकार ने गाय पालन को बढ़ाने की दिशा में ‘राष्ट्रीय कामधेनु योजना’ का एलान किया है। इसके साथ ही सरकार ने पशुपालन और मत्स्य पालन के लिए भी कर्ज में 2 प्रतिशत की छूट दी है। 

यह बात पक्की है कि इस बजट के एलान के बाद विपक्षी पार्टियों में जरूर हलचल मच गई होगी। अब देखना यह होगा कि आगामी लोकसभा चुनावों के लिए उनकी क्या रणनीति होगी या चुनावों में बने रहने के लिए वह जनता को किस प्रकार आकर्षित करते हैं।