+

लेपाक्षी मंदिर - 16वीं सदी की महानतम कृति, हवा में लटके हैं स्तंभ

भारत की वास्तु कला दुनिया में सबसे पुरातन मानी जाती है। इसी वास्तु कला के सहारे ऐसे बहुत से स्थान हमारे देश में प्राचीन काल में निर्मित किये गए थे। जो आज भी दुनियाभर के लोगों के लिए हैरान कर देते हैं। आज हम आपको भारत की एक ऐसी ही ईमारत के बारे में जानकारी मुहैया करा रहें हैं। यह एक मंदिर है जो आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले में स्थित है। लेपाक्षी मंदिर के नाम से प्रसिद्ध यह प्राचीन ईमारत आज भी दुनियाभर के लोगों को हैरत में डाल देती है। इस मंदिर की सबसे ख़ास बात इसके स्तंभ यानि खंबे है जो जमीन को स्पर्श नहीं करते हैं लेकिन फिर भी वे मंदिर के ऊपरी भाग को सम्हाले हुए हैं।

प्रतीकात्मक

 

16वीं सदी में किया गया था निर्मित - 

लेपाक्षी मंदिर अनंतपुर जिले के हिंदूपुर में स्थित है तथा बंगलुरु से करीब 120 किमी की दूरी पर है। यह मंदिर कछुए के आकार की एक पहाड़ी के ऊपर स्थित है। यही कारण है की इसको "कूर्म सैला" भी कहा जाता है। भगवान शिव के मुख्य गण " श्री वीरभद्र" इस मंदिर के इष्टदेव हैं। इस मंदिर में भगवान शिव के अन्य रूप भी प्रतिमाओं के रूप में स्थापित हैं। इस मंदिर का निर्माण 16वीं शताब्दी में किया गया था। पत्थर से निर्मित यह मंदिर अपने में एक खूबसूरत वास्तु कला का उदाहरण है। इस मंदिर में एक पत्थर का खंबा भी है। जिसकी लंबाई 27ft और ऊंचाई में 15 फुट है। यह एक नक्काशीदार स्तंभ है।

प्रतीकात्मक

 

ख़ास बात यह है की यह स्तंभ जमीन को नहीं छूता है बल्कि हवा में लटका रहता है। यही कारण है की इस खंबे को "लटका स्तंभ" भी कहा जाता है। राजमार्ग एनएच 7 के द्वारा यह मंदिर हैदराबाद तथा बंगलुरु जैसे बड़े शहरों से जुड़ा हुआ है। इस मंदिर के सबसे निकट का स्टेशन हिंदूपुर है। इस मंदिर के पास ही पुट्टपर्थी तथा धर्मावरम नामक अन्य दो स्थान भी दर्शन करने योग्य है।