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यहां चमत्कारिक रूप से ठीक हो जाते हैं पैरालायसिस रोगी

हमारे देश में बड़े स्तर पर मंदिर बने हुए हैं। इनमें से कुछ मंदिर अपने चमत्कारिक प्रभाव के कारण भी लोगों में काफी प्रसिद्ध हैं। आज हम आपको एक ऐसे ही मंदिर के बारे में बारे में जानकारी दे रहें हैं। इस मंदिर का नाम "बुटाटी धाम मंदिर" है। यह मंदिर राजस्थान राज्य के नागौर जिले के कुचेरा कस्वे में अजमेर-नागौर रोड पर स्थित है। इस मंदिर के बारे में 500 वर्ष पुरानी मान्यता लोगों में प्रसिद्ध है। यहां के स्थानीय लोग बताते हैं की 500 वर्ष पहले चतुरदास नामक एक सिद्ध संत यहां निवास करते थे। वे एक सिद्ध संत थे और अपनी ऊर्जा का बड़ा भाग वे लोगों के दुःख को दूर करने में लगाते थे।

प्रतीकात्मक

 

इस मंदिर में संत चतुरदास की समाधी भी है। जिसके सात चक्कर लगाने के बाद में रोगी का पैरालायसिस रोग चमत्कारिक रूप से ख़त्म हो जाता है। इस स्थान पर पुरे देश के लोग आते हैं तथा यहां पर माघ, वैशाख और भादव माह में पुरे महा मेला भी लगता है। यहां पर आने वाले पैरालायसिस के रोगियों के लिए निःशुल्क रहने तथा खाने की व्यवस्था भी है। लोगों का कहना है की मंदिर की परिक्रमा करने से भी रोगियों को बहुत लाभ मिलता है। यह मंदिर नागौर से 40 किमी दूर बुटाटी ग्राम में स्थित है। इस मंदिर की ख़ास बात यह है की यहां पर आपको न कोई पंडित मिलता है और न ही कोई महाराज।

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इस मंदिर में किसी प्रकार की दवाई या औषधि भी मरीज को नहीं दी जाती है। मरीज को बस 7 दिन तक मंदिर की परिक्रमा करनी होती है। मंदिर में स्थित हवनकुंड की विभूति रोगी के प्रभावित अंग पर लगाईं जाती है। इससे मरीज का रोग बड़े स्तर पर ख़त्म हो जाता है। यहां आपको बहुत से ऐसे मरीज मिलेंगे जो बड़े बड़े डाक्टरों से इलाज कराकर निराश हो चुके थे लेकिन यहां आकर उन्होंने बड़ा लाभ पाया है। इस मंदिर में लोग अपनी मर्जी से दान देते हैं और दान में आने वाला पैसा मंदिर के विकास तथा रोगियों की सुविधाओं के लिए लगाया जाता है। मंदिर परिसर के चारोंओर आपको बहुत से रोगी मिलते हैं जिनको यहां आकर बहुत लाभ पाया है।