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देश के लिए बुरी खबर, जल्द आ सकतीं है जल प्रलय जैसी आपदाएं

ग्लोबल वार्मिंग आज दुनिया के लिए बड़ी समस्या बनकर उभरी है। इस समस्या के कारण आज पूरी दुनिया सहमी हुई है। आज दुनिया के कई हिस्से जरुरत से ज्यादा ठंडे है तो कहीं जरुरत से ज्यादा गर्मी है। ये सभी चीजें ग्लोबल वार्मिंग से ही सम्बंधित हैं। 210 विशेषज्ञों ने ग्लोबल वार्मिंग को लेकर हालही में एक रिपोर्ट तैयार की है। इस रिपोर्ट में कहा गया है की इस सदी के अंत तक हिंदूकुश पर्वत श्रंखला के एक तिहाई से ज्यादा ग्लेशियर पिघल जाएंगे। आपको बता दें की इस पर्वतीय श्रंखला को पूर्वी एशिया का वाटर टावर कहा जाता है। यदि 1.50 सेल्सियस के साथ ग्लोबल वार्मिंग अपनी अच्छी स्थिति में हो तब भी यह सब हो सकता है। भारत के पूर्वी क्षेत्र के लिए यह अच्छी खबर नहीं मानी जा रही है।

प्रतीकात्मक

 

रिपोर्ट के अनुसार ऐसा होने पर पूर्वी हिमालय के ग्लेशियर ख़त्म होने की स्थिति में आ जाएंगे। रिपोर्ट में यह बताया गया है की यदि स्थिति अच्छी भी रहेगी तो भी साल 2100 के अंत तक यह क्षेत्र अपने लगभग 64 फीसदी ग्लेशियर को खो देगा। इस रिसर्च में यह पता लगा है की एक और जहां ग्लेशियर ख़त्म होंगे वहीँ दूसरी और पश्चिमी हिमालय यानि जम्मू और कश्मीर, हिमाचल, उत्तराखंड में बर्फ की बढ़ोतरी होगी। ऐसा अधिक बर्फवारी के कारण हो सकता है। 

प्रतीकात्मक

 

आएंगी आपदाएं तथा होगी जल प्रलय - 

रिपोर्ट में कहा गया है की इस स्थिति के आने पर भारत में कई बड़ी समस्याएं आ सकती हैं। रिपोर्ट के अनुसार ऐसी स्थिति में ग्लेशियरों का पिघलना ज्यादा हो जाएगा। इससे नदियों में जल का स्तर बढ़ जाएगा तथा नदियों में बाढ़ की स्थिति पैदा हो जायेगी। इस कारण कई तरह की प्राकृतिक आपदाएं भारत में आ सकती हैं। पीने के पानी की उपलब्धता में कमी आएगी और इससे करीब 2 अरब लोग दुनियाभर में प्रभावित होंगे। ग्लेशियर पिघलने से झीलों में बाढ़ का ख़तरा बढ़ जाएगा तथा हजारों लोग इससे प्रभावित होंगे। कुल मिलाकर ग्लोबल वार्मिंग आज दुनियाभर के लिए बड़ा ख़तरा बनकर उभरी है और पूरे विश्व को इसके लिए विचार करना होगा तथा जल्दी ही कोई सकारात्मक निर्णय निकालना होगा।