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जिंदगी से जूझ रहा था नक्सली, सीआरपीएफ जवान ने खून देकर बचाई जान

भारत के कुछ राज्यों में नक्सलियों का बड़ा आतंक है। इन जगहों पर नक्सलियों के सबसे बड़े दुश्मन सीआरपीएफ के जवान होते हैं। आए दिन नक्सली जवानों को निशाना बनाते रहते हैं। कभी सीआरपीएफ के वाहनों में ब्लास्ट तो कभी घात लगाकर जवानों पर हमले की खबरें सामने आती रहती हैं। हाल ही में नक्सलियों द्वारा सीआरपीफ के कोबरा जवानों पर हमला किया गया, तो जवानों की जवाबी कार्यवाई में कई नक्सली मारे गए। उनमें से एक नक्सली बुरी तरह घायल था। जब उसे हॉस्पिटल ले जाया गया तो डॉक्टरों ने कहा - अगर उसे खून नहीं मिला तो वह मर जाएगा। उसके बाद सीआरपीएफ के एक जवान ने उसे अपना खून दिया, जिससे नक्सली अब खतरे से बाहर है। 

प्रतीकात्मक

 

नक्सलियों ने जवानों पर घात लगाकर किया था हमला

यह घटना झारखंड के नक्सल प्रभावित क्षेत्र खूंटी की है। 29 जनवरी को खूंटी के जंगलों में सीआरपीएफ की 209-कोबरा बटालियन और नक्सलियों के बीच जमकर फायरिंग हुई। इस मुठभेड़ में 5 नक्सली मारे गए, वहीँ 2 घायल भी हुए। इसके बाद घायल नक्सली (सोमोपूर्ति) को रांची के राजेंद्र इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में भर्ती कराया गया। 

सीआरपीएफ झारखंड सेक्टर के आईजी संजय लाटकर का कहना है कि हमारे जवानों की नजर जब उस नक्सली की हालत पर पड़ी, तो वे फायरिंग के बीच जाकर उसे ले आये। उसके शरीर से बहुत खून बह रहा था। यदि वह जंगल में पड़ा रहता तो उसकी मौत तय थी। हॉस्पिटल ले जाने पर डॉक्टरों को खून की जरूरत पड़ी। अक्सर जब भी डॉक्टर्स को खून की जरूरत पड़ती है, तो वह सीआरपीएफ से ही कॉन्टेक्ट करते हैं। उस दिन भी जब 133 बटालियन को सन्देश पहुंचा, तो सीआरपीएफ के कांस्टेबल राजकमल इंसानियत के नाते नक्सली को खून देने अस्पताल पहुंच गए। जिससे नक्सली की जान बच गई। संजय लाटकर ने कांस्टेबल राजकमल की सराहना करते हुए उन्हें प्रशंसा पत्र और दो हजार रुपये का नकद पुरस्कार देकर सम्मानित भी किया।

प्रतीकात्मक

 

गणतंत्र दिवस पर 1100 यूनिट रक्त दान किया था सीआरपीएफ ने

वहीँ आईजी संजय लाटकर ये भी बताते हैं कि सीआरपीएफ केवल नक्सलियों से लड़ती ही नहीं है, बल्कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में स्कूल, पेयजल, बिजली और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतें भी पूरा करती है। उन्होंने बताया कि इस गणतंत्र दिवस को सीआरपीएफ के अफसरों और जवानों ने 11 सौ यूनिट रक्तदान किया था।