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इस जगह के लोग क्यों कराते हैं लड़कियों की कुत्तों से शादी

प्रतीकात्मक

वैसे तो हमारे देश में संस्कृति को एक अनमोल धरोहर माना जाता है। लेकिन जब समाज में संस्कृति केवल अंधविश्वास बनकर रह जाती है, तो यही धरोहर समाज पर गलत तरीके से प्रभाव डालती है और समाज को आगे नहीं बढ़ने देती। इसी प्रकार के एक अंधविश्वास को मानते हैं, छत्तीसगढ़ के कोरबा में रहने वाले संथाल आदिवासी के लोग। 

संथाल आदिवासी लोगों में एक ऐसी ही पुरानी परंपरा आज भी चली आ रही है। इसमें ये लोग तीन से पांच साल के बच्चों की शादी कुत्ते के पिल्ले से करवा देते हैं। इन लोगों का मानना है कि बच्चों की इस प्रकार से शादी कराने पर उनकी ज़िंदगी पर आने वाला संकट हमेशा के लिए दूर हो जाता है। दोष किसी बालक पर हो तो शादी मादा पिल्ले से कराई जाती है और अगर दोष बालिका पर हो तो शादी नर पिल्ले से कराई जाती है। 

मकर संक्रांति त्योहार को कराई जाती है सामुहिक शादी

प्रतीकात्मक

संथाल आदिवासी लोग मकर संक्रांति के त्योहार को धूम-धाम से मनाते हैं। हर साल इसी दिन पूरी बस्ती के बच्चों का कुत्ते के बच्चों के साथ धूम-धाम से सामुहिक विवाह कराया जाता है। इसके बाद पूरे समाज के लोगों को भोज कराया जाता है। यदि कोई मकर संक्रांति के दिन चूक जाता है, तो वह अपने बच्चों की शादी होली के दौरान करवाते हैं। 

उड़ीसा से है संथाल प्रजाति

ये आदिवासी लोग पहले उड़ीसा के मयूरभांज जिले में रहते थे। लेकिन बाद में वहां से आकर कुछ कोरबा में बस गए थे। इन लोगों में ये परंपरा कई वर्षों से चली आ रही है। सालों से बच्चों की ज़िंदगी की बाधाएं दूर करने के लिए ये लोग अपने बच्चों की शादी किसी पिल्ले से करवा देते हैं।