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पबजी जैसे खतरनाक ऑनलाइन गेम्स के कारण एम्स में बढ़ी मरीजों की संख्या

पबजी यानी की 'प्लेयर अननोन बैटल ग्राउंड,' इस गेम की लत में लगभग हर 8 से 22 साल तक के बच्चे डूबे हुए हैं। जो बच्चे एक शाकाहारी परिवार में पैदा हुए हैं और बचपन से शाकाहारी हैं, उन पर भी इसे जीतकर चिकन डिनर करने की धुन सवार है। दरअसल ये गेम अब सिर्फ गेम नहीं रह गया है, यह अब गेम खेलने वालों की आदत या लत हो चुका है। अब कई सारे ऐसे किस्से सामने आ रहे हैं, जिनसे पता चलता है कि पबजी और इसके जैसे कई ऑनलाइन गेम्स बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल रहे हैं।

प्रतीकात्मक

 

 दिल्ली सरकार - बच्चों को मानसिक तौर पर बीमार कर रहे हैं ऑनलाइन गेम्स

दिल्ली सरकार के दिल्ली कमीशन फॉर प्रोटेक्शन और चाइल्ड राइट्स (डीसीपीसीआर) ने सभी स्कूलों में बच्चों के अभिभावकों को नोट भेजकर उन्हें बताया है कि पबजी, फोर्टनाइट, हिटमैन और पोकेमोन गो जैसे ऑनलाइन और वीडियो गेम बच्चों के लिए खतरनाक हैं। ये बच्चों को मानिसक तौर पर प्रभावित करते हैं। इस नोट में आगे कहा है कि ‘ये गेम्स महिला-विरोधी, नफरत, छल-कपट और बदला लेने की भावना से भरे हुए हैं। एक ऐसी उम्र जब बच्चे चीजें सीखते हैं, यह उनके जीवन और मस्तिष्क पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं।‘ 

डीसीपीसीआर की सदस्य रंजना प्रसाद ने कहा, "इन हिंसक वीडियो गेम्स की वजह से बच्चों का बचपन छिन रहा है।" अभिभावकों को भेजे गए इस नोट में बच्चों को इससे दूर रखने के उपाय भी बताए गए हैं।

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एम्स में बढ़ी पबजी पीड़ितों की संख्या

वहीँ रिपोर्ट के अनुसार इन ऑनलाइन गेम्स के चलते एम्स में बाल मरीजों की संख्या भी बढ़ गई है। डॉक्टरों द्वारा बताया जा रहा है कि हर सप्ताह चार से पांच मरीज अकेले पबजी वाले ही हैं। इन मरीजों की उम्र 8 से 22 तक के बीच है। यही नहीं, नौकरी पेशे वाले युवा भी इस गेम की लत से पीड़ित हैं। कई युवा डॉक्टरों के पास काउंसलिंग के लिए पहुंच रहे हैं। इन युवाओं का कहना है कि, उन्हें पबजी की इतनी लत हो गई है कि वे ऑफिस का पूरा लंच टाइम पबजी खेलकर ही गवां देते हैं। 

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गुजरात में बैन है पबजी

अभी हाल ही में गुजरात सरकार ने स्कूली छात्रों के लिए पबजी खेलना बैन कर दिया था। वहीँ एक रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि पिछले दो साल में गेम्स के आदि बच्चों की संख्या तीन गुना बढ़ गई है।