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अक्सर जीवन में क्यों असफल हो जाते हैं लोग -चाणक्य नीति

किसी इंसान के जीवन में सफलता और असफलता उस इंसान की सोच और कर्म पर निर्भर करती है। कुछ लोग ज्यादा पाने की चाह में, हाथ आई चीज को अपनी ही गलती से गंवा देते हैं। चाणक्य नीति में ऐसे लोगों को मूर्ख बताया गया है। ऐसे लोग सिर्फ प्लान बनाते रहते हैं और जो चीज उनकी पहुंच में है, उसे गवां देते हैं। अक्सर इस प्रकार के लोग उन चीजों के पीछे भागते हैं, जो कभी उनकी हुई ही नहीं। ऐसे लोग हर काम लापरवाही से करते हैं। आचार्य चाणक्य ने ऐसे लोगों के सफल होने के लिए कहा है कि हर काम को योजना बनाकर करें। ऐसे लोगों को सफल होने के लिए चाणक्य नीति के पहले अध्याय के 13वें श्लोक को समझ लेना चाहिए।

प्रतीकात्मक

 

चाणक्य नीति का श्लोक

यो ध्रुवाणि परित्यज्य अध्रुवं परिषेवते ।

ध्रुवाणि तस्य नश्यन्ति चाध्रुवं नष्टमेव हि ॥ ०१-१३

चाणक्य नीति के इस श्लोक के अनुसार जो लोग निश्चित को छोड़कर अनिश्चित की तरफ भागता है। उसके जीवन में निश्चित चीजें नष्ट होने लगती हैं और जो अनिश्चित था वो तो नष्ट है ही। इसका अर्थ है कि जीवन में जो मिलना तय है, उसे पहले ले लेना चाहिए। जब तक जीवन में तय चीजें प्राप्त न कर लो, दूसरी चीजों की तरह नहीं भागना चाहिए। आचार्य चाणक्य के इस श्लोक के अनुसार जीवन में अनिश्चित चीजों पर विश्वास करना मूर्खता है। जीवन में हमेशा पहले वो कार्य करने चाहिए, जिनका नतीजा निश्चित है। 

उनके अनुसार ऐसे लोग अनिश्चित लाभों के पीछे भागकर, तय और संभावित दोनों तरह के फायदों से दूर रह जाते हैं। इसीलिए क्यों न पहले तय चीजों का लाभ लिया जाए और उसके बाद संभावित चीजों को प्राप्त करने की कोशिश की जाए।