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ऐसा नहीं था 1906 में फहराया गया पहला राष्ट्रीय ध्वज

इस साल 2019 में 26 जनवरी को देश अपना 70वां गणतंत्र दिवस मनाने जा रहा है। हर साल की तरह इस साल भी लाल किले पर देश का राष्ट्रीय ध्वज 'तिरंगा' शान से लहरायेगा। हर साल की तरह इस साल भी देश के हर स्कूलों में, हर सरकारी इमारतों में हर जगह तिरंगा ही तिरंगा दिखेगा। लेकिन क्या आप जानते हैं जो तिरंगा हम आज फहराते हैं, वह हमारा पहला नहीं बल्कि छठा राष्ट्रीय ध्वज है। दरअसल अग्रेंजों के समय तक हमारे राष्ट्रीय ध्वज के कई रंग तथा कई स्वरुप बदले। अपने इस रूप में पहुंचने के लिए इसे अनेक दौरों से गुजरना पड़ा। आइए जानते हैं हमारे राष्ट्रीय ध्वज के स्वरुप कैसे बदलते गए। 

प्रतीकात्मक

पहला राष्ट्रीय ध्वज : जानना अत्यंत रोचक होगा कि देश के राष्ट्रीय ध्वज को स्वतंत्रता संग्राम के दौरान खोजा गया। देश का राष्ट्रीय ध्वज सबसे पहले 7 अगस्त 1906 को पारसी बागान चौक (ग्रीन पार्क) कलकत्ता में फहराया गया था। इस ध्वज को लाल, पीले और हरे रंग की पट्टियों से बनाया गया था। 

दूसरा राष्ट्रीय ध्वज - इस ध्वज को पेरिस में मैडम कामा और उनके साथ निर्वासित किए गए कुछ क्रांतिकारियों द्वारा 1907 में फहराया गया था। यह पहले ध्वज से काफी मिलता जुलता था। यह ध्वज बर्लिन में हुए समाजवादी सम्मलेन में भी प्रदर्शित किया गया था। 

तीसरा राष्ट्रीय ध्वज : 1917 में जब देश में राजनीतिक संघर्ष एक निश्चित मोड़ लेने लगी। तब डॉ. एनी बेसेंट और लोकमान्य तिलक ने घरेलू शासन आंदोलन के दौरान इसे फहराया। यह पहले दो ध्वजों से अलग था और इसके बाई ओर ऊपरी कोने में इंग्लैंड का राष्ट्रीय ध्वज (यूनियन जैक) भी बना था। 

प्रतीकात्मक

 

चौथा राष्ट्रीय ध्वज : 1921 में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सत्र के दौरान एक युवक ने एक झंडा बनाकर गाँधी जी को दिया। इसमें लगे दो रंग हिन्दू और मुस्लिम समुदायों का प्रतिनिधित्व करते थे। गाँधी जी ने इसी झंडे के मध्य में चरखा बनवा कर इसे गैर आधिकारिक रूप से राष्ट्रीय ध्वज अपना लिया था। 

पांचवां राष्ट्रीय ध्वज : वर्ष 1931 ध्वज के इतिहास में एक यादगार वर्ष रहा। तिरंगे को देश के राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाने के लिए एक प्रस्ताव पारित किया गया। यह ध्वज वर्तमान तिरंगे के स्वरूप का पूर्वज था। यह तिरंगा तो था, लेकिन इसके मध्य में गाँधी जी का चरखा भी था। 

छठा राष्ट्रीय ध्वज : अंततः 22 जुलाई 1947 में भारतीय संविधान सभा की एक बैठक के दौरान वर्तमान तिरंगे को देश के राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाया गया। इसके साथ 26 जनवरी 1950 के बाद भारतीय गणराज्य ने भी तिरंगे को राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपना लिया था। और इस प्रकार यह तिरंगा स्वतंत्र भारत का राष्ट्रीय ध्वज बना।