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अंतिम संस्कार से पहले ही चिता से उठ गया मृतक युवक, कहा- गलती से ले गए थे फ़रिश्ते

माना जाता है जब किसी व्यक्ति की मौत आती है तो उसकी आत्मा को लेने के लिए फ़रिश्ते या यमदूत आते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सुना है की कोई फरिश्ता किसी को गलती से ले जाए। यह घटना पंजाब से सामने आई है। आपको बता दें की पंजाब के बरनाला क्षेत्र के गांव पक्खोकलां के निवासी गुरतेज सिंह को पीजीआई हॉस्पिटल के डाक्टरों ने मृत घोषित कर दिया था। लेकिन इसके ठीक आठ घंटे बाद में वह जीवित हो उठा। इस घटना से सभी लोग हैरान हो उठे। कुछ स्थानीय लोग पीजीआई के डाक्टरों के खिलाफ कार्यवाही की मांग कर रहें हैं। 

प्रतीकात्मक

ख़बरों के अनुसार सिंगारा सिंह के 15 वर्षीय बेटे गुरतेज सिंह की एक आंख की रौशनी कम हो गई थी। जिसके बाद में गुरतेज सिंह को बठिंडा के सिविल अस्पताल में भर्ती करा दिया गया था। वहां के डाक्टरों ने उसके सिर में रसौली बताई तथा गुरतेज सिंह को वहां से डीएमसी लुधियाना और उसके बाद में वहां से पीजीआई चंडीगढ़ को रेफर कर दिया गया। घर के लोगों ने 10 जनवरी को गुरतेज सिंह को पीजीआई चंडीगढ़ में भर्ती करा दिया था। 11 जनवरी को वहां के डाक्टरों ने गुरतेज सिंह को मृत घोषित कर दिया। पीजीआई से गुरतेज सिंह को घर ले आया गया तथा उसके अंतिम संस्कार की तैयारी होने लगी। इसी क्रम में जब गुरतेज के कपड़े बदले जा रहे थे तब सतनाम सिंह ने गुरतेज की सांस चलने का अनुभव किया। इसके बाद पास की केमिस्ट शॉप के एक व्यक्ति को वहां बुलाया गया। उसने चेक किया तो पाया की गुरतेज जिंदा है। इसी दौरान गुरतेज ने आंख खोल दी तथा परिजन उसको बरनाला के सिविल अस्पताल में ले गए। वहां के डाक्टरों ने गुरतेज को फरीदकोट के बाबा फरीद अस्पताल में रेफर कर दिया। गुरतेज की मां ने बताया की वह उनकी एकलौती संतान है तथा अब तक उसके इलाज में 4 लाख का खर्च भी आ चुका है। पीजीआई के जिन डाक्टरों ने गुरतेज को मृतक घोषित कर दिया था उनके खिलाफ कार्यवाही की जानी चाहिए।