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मध्यप्रदेश में कांग्रेस विधायक ने दी इस्तीफे की धमकी

प्रतीकात्मक

साल 2018 में देश के पांच राज्यों में चुनाव हुए। इन पांच में से तीन राज्यों में कांग्रेस ने बाजी मारी और बहुमत पूरा करते हुए सरकार बनाने में सफल रही। ये तीन राज्य थे राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़। इन तीनों राज्यों में मुख्यमंत्री बनने के बाद मंत्रिमंडल की घोषणा भी हो गयी है। अब मंत्रिमंडल बनने के बाद राजस्थान और छत्तीसगढ़ में तो सब ठीक है, लेकिन मध्य प्रदेश में पार्टी के भीतर माहौल कुछ बिगड़ता दिख रहा है। जिससे मध्य प्रदेश के सीएम कमलनाथ और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी के सामने नई चुनौती पेश हो गयी है। 

इस्तीफे से लूंगा बदला: कांग्रेस विधायक

मध्य प्रदेश में कांग्रेस को पहले यह चुनौती मंत्री न बनाये जाने पर उसकी सहयोगी समाजवादी पार्टी से मिली थी। लेकिन अब यह चुनौती कांग्रेस के ही विधायक ने दी है। यह विधायक हैं मध्य प्रदेश बदनावर सीट से राजवर्धनसिंह दत्तीगांव। दत्तीगांव ने पार्टी पर वंशवाद के नाम पर हक मारने का आरोप लगाया है। 

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उनका कहना है कि उनके क्षेत्र की जनता को इस बार उनके मंत्री बनने की उम्मीद थी, मगर वंशवाद की वजह से उनका हक छीन लिया गया। साथ ही उन्होंने धमकी भरे अंदाज में कहा कि 'मैं इस अन्याय का बदला इस्तीफे से दूंगा।' राजवर्धनसिंह दत्तीगांव ने यह भी कहा कि 'मंत्री बनने का मुझे शौक नहीं, बल्कि ये मेरा हक है। अगर मैं किसी बड़े नेता या पूर्व मुख्यमंत्री का बेटा होता तो जरूर मंत्री बनता।' बता दें कि बदनावर सीट से राजवर्धनसिंह दत्तीगांव को 41 हजार से ज्यादा वोटों से जीत मिली थी। 

नाराज़ समर्थकों ने भी दी इस्तीफे की धमकी

वहीँ दिग्विजय के मुख्यमंत्री रहते समय महत्वपूर्ण विभाग संभाल चुके वरिष्ठ नेता केपी सिंह, एदल सिंह कंसाना और बिहासूलाल सिंह के समर्थकों ने पार्टी को तीन दिनों का अल्टीमेटम दे दिया है। यह अल्टीमेटम अपने नेता को मंत्री बनाने को लेकर है। इसी बीच सुमावली से ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष मदन शर्मा ने कंसाना को मंत्री नहीं बनाने के विरोध में पार्टी से इस्तीफ़ा दे दिया है। वहीं कांग्रेस के नाराज विधायक केपी सिंह, ऐदल सिंह कंसाना, बिसाहूलाल सिंह समेत 10 विधायक दिल्ली पहुंच गए हैं। वह राहुल गांधी से मुलाकात करके अपनी बातरख सकते हैं। 

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विभाग बांटने को लेकर हो रही वकालत

विभागों को लेकर एमपी में अभी भी पेंच फंसा हुआ है। सभी दिग्गज नेता अपने-अपने पसंदीदा नेता को महत्वपूर्ण विभाग देने की वकालत कर रहे हैं। जहां सिंधिया ग्रह और परिवहन विभाग तुलसी सिलावट को दिलवाना चाहते हैं, वहीँ मुख्यमंत्री कमलनाथ राजपुर के विधायक बाला बच्चन को ये विभाग सौंपना चाहते हैं। दूसरी तरफ दिग्विजय सिंह डॉ. गोविन्द सिंह को ग्रह विभाग देने की वकालत कर रहे हैं, तो अपने बेटे जयवर्धन सिंह वित्त विभाग देने पर अड़े हुए हैं।